उधर, प्रदेश में नवरात्र के बाद सरकार और संगठन में फिर बडे़ फेरबदल की सुगबुगाहट शुरू हो गई है। भाजपा संगठन के कुछ प्रमुख नेताओं को छह अप्रैल के बाद नई दिल्ली बुलाए जाने की तैयारी है। निष्क्रिय बोर्डों-निगमों के कुछ अध्यक्षों-उपाध्यक्षों की तो कुर्सी भी जा सकती है। अच्छी परफॉर्मेंस न देने वाले मंत्रियों पर भी आंच आने की चर्चा शुरू हो गई है। चुनावी साल में सरकार और संगठन को अधिक चुस्त करने के लिए केंद्रीय नेतृत्व कुछ नए प्रयोग कर सकता है। राज्य में वर्तमान में भाजपा का ध्यान छह अप्रैल को मनाए जा रहे स्थापना दिवस पर है। इसे आम आदमी पार्टी के मंडी रोड शो को काउंटर करने के लिए भाजपा बड़े स्तर पर मनाने जा रही है।
हर विधानसभा क्षेत्र में पांच हजार कार्यकर्ता जुटेंगे। इसी दिन भाजपा महासंपर्क अभियान भी शुरू करने जा रही है। इसके बाद नवरात्र केे दौरान ही भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सुरेश कश्यप और अन्य प्रमुख संगठन नेताओं को दिल्ली बुलाए जाने की भी तैयारी है। नवरात्र में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा उनके साथ बैठक ले रहे हैं। हिमाचल प्रदेश में इस साल के अंत में विधानसभा के चुनाव हैं। इसके लिए अक्तूबर के बाद आचार संहिता लग सकती है। ऐसे में सरकार अभी से मिशन रिपीट की तैयारी में जुट सकती है।
हालांकि , भाजपा के राज्य प्रभारी अविनाश राय खन्ना ने बताया है कि अभी कुछ तय नहीं किया गया है। अभी कुछ कहना सही नहीं होगा।
सुरेश भारद्वाज की नड्डा से मुलाकात के निकाले जा रहे कई सियासी मायने
- शहरी विकास मंत्री सुरेश भारद्वाज की भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा से मुलाकात के कई सियासी मायने निकाले जा रहे हैं। नड्डा ने उनसे भी हिमाचल में सरकार और संगठन की चाल के बारे में फीडबैक लिया है। हालांकि, भारद्वाज का कहना है कि उन्होंने अपने विभागीय मसलों पर बात की है।