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येलो लाइन पर बढ़ा विवाद, अब सरकार ने बुलाई बैठक

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शिमला। राजधानी में येलो लाइन पार्किंग को लेकर जिला प्रशासन और नगर निगम के बीच चल रही तनातनी पर अब सरकार खुद हरकत में आ गई है। सरकार ने इस मामले पर बैठक बुलाने का फैसला लिया है।
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शहरी विकास विभाग के प्रधान सचिव प्रबोध सक्सेना इसी हफ्ते जिला प्रशासन और नगर निगम की संयुक्त बैठक लेने जा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार यह बैठक एक या दो अगस्त को बुलाने की तैयारी चल रही है। इस बैठक में उपायुक्त और आयुक्त से येलो लाइन लगाने में हो रही देरी पर सवाल पूछे जा सकते हैं। आमने सामने इनकी आपत्तियों को भी सुना जाएगा। सीएम जयराम ठाकुर ने एक जुलाई को खलीनी बस हादसे के बाद शहरवासियों को येलो लाइन पार्किंग की सुविधा देने और अवैध पार्किंग पर कार्रवाई करने के सख्त आदेश दिए थे। इसके बाद पुलिस ने अवैध पार्किंग पर तो डंडा चलाया लेकिन नगर निगम और जिला प्रशासन येलो लाइन पार्किंग की सुविधा अब तक जनता को नहीं दे पाए।
येलो लाइन पार्किंग प्लान की फाइल नगर निगम और जिला प्रशासन के बीच झूल रही है। सीएम के आदेशों के बावजूद येलो लाइन लगाने में हो रही देरी पर सवाल उठना शुरू हो गए हैं। प्रधान सचिव इस मामले पर गंभीर है और सीएम के आदेश जल्द लागू करवाने के लिए बैठक बुलाने जा रहे हैं।
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आयुक्त के लौटने का हो रहा इंतजार
नगर निगम आयुक्त पंकज राय इंग्लैंड दौरे पर हैं। वह सोमवार शाम तक शिमला वापस लौट सकते हैं। इसके बाद 31 जुलाई को नगर निगम की मासिक बैठक होनी है। इसके तुरंत बाद येलो लाइन पार्किंग को लेकर बैठक बुलाने की तैयारी चल रही है। नगर निगम ने 11553 गाड़ियों को येलो लाइन पार्किंग की सुविधा देने का प्लान बनाया है। लेकिन जिला प्रशासन ने अभी इसे नोटिफाई नहीं किया है।
सरकार के पास पहुंची लड़ाई
शहर में पार्किंग को लेकर नगर निगम और जिला प्रशासन के बीच चल रहा विवाद सरकार के पास भी पहुंच चुका है। निगम और जिला प्रशासन के अधिकारी सरकार के पास जाकर खुद को सही बता रहे हैं। येलो लाइन लगाने को लेकर असमंजस के चलते जिला प्रशासन ने तीसरी बार इसकी फाइल निगम को लौटाई है। निगम से कहा गया है कि जिन जगहों पर येलो लाइन लगनी है, वहां अभी हल्के निशान लगाए जाएं ताकि इनकी वेरिफिकेशन में आसानी हो। सड़कों की चौड़ाई का ब्यौरा देने को भी कहा है। लेकिन निगम अपने प्लान पर अड़ा है। ऐसे में प्रशासन के दिशा निर्देशों के बावजूद काम नहीं किया है। निगम का दावा है कि पार्किंग प्लान पुलिस की मौजूदगी में वेरिफिकेशन करने के बाद ही बनाया गया है। ऐसे में इसे नोटिफाई करने में परेशानी नहीं होनी चाहिए।
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