हिमाचल प्रदेश कुल्लू जिले के चिकित्सा खंड जरी में छह साल की बच्ची में पोलियो जैसे लक्षण सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग के हाथ-पांव फूल गए हैं। बच्ची को क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू में भर्ती कर उसका रिकॉर्ड खंगालना शुरू कर दिया है। बच्ची ने पोलियो खुराक ली है या नहीं, इस बारे में भी परिजनों से पता लगाया जा रहा है। दरअसल, एक्यूट फ्लेसिड पैरालिसिस (एएफपी) में पोलियो भी शामिल है। जिस क्षेत्र की यह बच्ची है, उस क्षेत्र में शून्य से पांच साल तक के बच्चों को विभागीय टीम ने मौके पर पहुंचकर एहतियातन पोलियो की खुराक पिलाई है। जिले में एक्यूट फ्लेसिड पैरालिसिस का मामला 25 नवंबर को सामने आया है। बच्ची के सैंपल लेकर कसौली भेजे गए हैं। रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। रिपोर्ट करीब 10 दिन बाद मिलेगी। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एनआर पवार ने कहा कि चिकित्सा खंड जरी में ऐसा मामला सामने आया है। बच्ची पोलियो से ग्रसित है या नहीं, इसके लिए सैंपल लेकर कसौली भेजे गए हैं। कहा कि बच्ची पहले से बेहतर है।
क्या है एएफफी
एक्यूट फ्लेसिड पैरालिसिस (एएफपी) की पहचान 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में बिना किसी स्पष्ट कारण के मांसपेशियों के अचानक कमजोर होने से की जाती है। पोलियो, वेस्ट नाइल या गुइलेन-बैरे सिंड्रोम जैसे वायरस एएफपी का कारण बन सकते हैं। 2011 में आया था पोलियो का अंतिम मामलादेश में पोलियो का आखिरी मामला 13 जनवरी 2011 को पश्चिम बंगाल में सामने आया था। इसके बाद 27 मार्च 2014 को विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने भारत को करीब तीन साल बाद पोलियो मुक्त प्रमाणित किया था, लेकिन कुल्लू में एएफपी के लक्षण मिलने से दिक्कतें दोबारा बढ़ गई हैं। रिपोर्ट आने के बाद ही पता चल पाएगा कि देश में फिर पोलियो ने दस्तक दी है या नहीं।