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केसीसी के अंशकालिक कर्मियों को मिल सकता है बड़ा तोहफा, बीओडी बैठक में हुई चर्चा

Tue, 09 Jul 2019 10:25 AM IST
Krishan Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, धर्मशाला
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केसीसी बैंक के पार्ट टाइम कर्मियों के लिए नीति बनाई जा सकती है। इस आशय पर बैंक के बीओडी की सोमवार को आयोजित बैठक में चर्चा की गई। बैठक में वित्त से संबंधित रूटीन के कार्यों को लेकर कुछ निर्णय भी लिए गए।

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चर्चा में शामिल मुद्दों में 2500 रुपये मासिक मानदेय पाने वाले वाटर कैरियर के भविष्य को सुरक्षित करने पर जोर दिया गया। इसको लेकर केसीसी बैंक के चेयरमैन और बाकी नामित सदस्य चिंतित दिखे।

इसके अलावा इन कर्मचारियों को 12 साल तक पार्ट टाइम के रूप में सेवाएं देनी पड़ रही हैं। इन कर्मचारियों का मानदेय बढ़ाने और पार्ट टाइम कम करने को लेकर पॉलिसी बनाने को लेकर चर्चा हुई। माना जा रहा है कि अगली बीओडी में पार्ट टाइम कर्मचारियों के लिए राहत भरी घोषणा हो सकती है। 

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भारद्वाज अब बोले - शाखाएं बंद नहीं शिफ्ट होंगी

केसीसी बैंक के चेयरमैन डॉ. राजीव भारद्वाज ने बताया कि बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की बैठक हर एक-डेढ़ माह बाद आयोजित होती है। इस बैठक में ऐसे खर्चों को स्वीकृति दी जाती है, जिन्हें केवल बीडीओ के माध्यम से ही पास किया जा सकता है।

बैंक के एमडी भी पांच लाख तक की अनुमति दे सकते हैं, जबकि इससे अधिक खर्च के लिए बीओडी की बैठक में मामला रखा जाता है। सोमवार को भी बीओडी की रूटीन बैठक हुई। उन्होंने बताया कि पार्ट टाइम कर्मचारियों को राहत देने के लिए चर्चा तो हुई लेकिन कोई निर्णय नहीं हुआ है। 

भारद्वाज ने कहा कि कुछ शाखाएं राजनीति से प्रेरित होकर खोली जाती हैं। उन शाखाओं का उन्होंने खुद दौरा किया है जो घाटे में चल रही हैं। ऐसी शाखाओं को बंद तो नहीं किया जाएगा, लेकिन आगे-पीछे शिफ्ट किया जा सकता है।
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नामित सदस्यों को नहीं है शाखाएं खोलने-बंद करने का हक: सिपहिया

कांगड़ा केंद्रीय सहकारी बैंक समिति के पूर्व चेयरमैन जगदीश सिपहिया ने कहा कि केसीसी बैंक में अभी तक कोई बोर्ड नहीं है। तीन नामित सदस्यों के सहारे ही बैंक शाखाओं को खोलने और बंद करने के निर्णय नहीं लिए जा सकते। प्रदेश सरकार की नाकामी के कारण ही आज तक बैंक की बीओडी का गठन नहीं हो पाया है।

बैंक के सबसे जूनियर अधिकारी बैंक में मठाधीश बन बैठे हैं जो बैंक चेयरमैन को गुमराह कर रहे हैं। उन्होंने अध्यक्ष को सलाह दी है कि वे इन कर्मचारियों के बहकावे में न आकर अपने विवेक से कार्य कर बैंक को बुलंदियों तक पहुंचाएं।
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