जिला प्रशासन ने प्रस्ताव तैयार कर सरकार को भेजा, अपराधियों को पकड़ने के लिए स्पेशल फंड बनाने की है तैयारी
राजधानी शिमला समेत सात थानों में नहीं है गाड़ियां
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। चिट्टे के खिलाफ जंग लड़ रही शिमला पुलिस के हाथ अब और मजबूत करने की तैयारी है। इसके लिए जिला प्रशासन से प्रस्ताव तैयार कर सरकार को भेज दिया है। इसे मंजूरी मिली तो जल्द ही जिले के सभी थानों के पास गश्त के लिए नई गाड़ियां होंगी।
यही नहीं, बाहरी राज्यों से अपराधियों को पकड़कर शिमला लाने के लिए भी पुलिस को स्पेशल फंड मिल सकता है। जिला प्रशासन की ओर से तैयार प्रस्ताव के अनुसार सभी थानों के लिए पेट्रोलिंग वाहन देने की मांग सरकार से की गई है। हाल ही में हुई जिला एनकार्ड समिति की बैठक में पुलिस विभाग ने वाहनों की कमी का मुद्दा उठाया था। पुलिस का कहना है कि चिट्टे के तस्कर तो लग्जरी गाड़ियों में घूम रहे हैं लेकिन इन्हें पकड़ने के लिए थाना पुलिस के पास वाहन की सुविधा तक नहीं है। पुलिस जवान अपने खर्च पर गश्त के लिए जा रहे हैं। चिट्टे के खिलाफ चल रहे अभियान में तो शिमला पुलिस प्रदेशभर में सबसे आगे है लेकिन सुविधाएं न होने से जवान निराश हैं। राजधानी शिमला के दो थानों समेत जिले के सात पुलिस थानों में जवानों के पास गश्त तक के लिए वाहन नहीं हैं। पुलिस चौकियों में पहले ही वाहन सुविधा नहीं है। ऐसे में नशे के चक्रव्यूह को तोड़ना मुश्किल हो रहा है।
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सरकार को भेजा है प्रस्ताव : डीसी
उपायुक्त (डीसी) अनुपम कश्यप ने कहा कि जिला शिमला नशे के खिलाफ चल रहे अभियान में काफी आगे है। पुलिस को और सुविधाएं देने का प्रस्ताव तैयार किया है ताकि जिले से चिट्टे समेत अन्य नशे के तस्करों का सफाया हो सके। पुलिस को नए वाहन देने को लेकर प्रस्ताव तैयार किया है जिसे सरकार को भेज दिया है।
स्पेशल फंड की मिल सकती है सुविधा
चिट्टे का कारोबार कई राज्यों में फैला है। जांच के दौरान कई बार पुलिस को बाहरी राज्यों में जाकर अपराधियों को पकड़कर लाना पड़ता है। इसके लिए होने वाला खर्च कई बार पुलिस जवानों को अपनी जेब से देना पड़ता है। इसलिए स्पेशल फंड बनाने की योजना है ताकि पुलिस जवानों को जांच के लिए बाहर जाते वक्त बजट की कमी न आए। देश के कई राज्यों में इस फंड का प्रावधान है। इसी तर्ज पर शिमला पुलिस के लिए भी सरकार से यह फंड देने का मामला उठाया जा रहा है।