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Shimla News: एससी-एसटी मामले कोर्ट में साबित नहीं कर पा रही पुलिस

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जिला स्तरीय सतर्कता समिति की बैठक में पेश की रिपोर्ट, अब जांच के लिए नए स्तर पर बनेगी रणनीति
एक्ट में आरोपियों के बरी होने की दर है ज्यादा
कहां कमजोर रह रही जांच, इसका होगा अध्ययन
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। जिले में अनुसूचित जाति/जनजाति के तहत दर्ज मामलों में बरी होने वालों की दर ज्यादा है। जिला पुलिस इस एक्ट के तहत दर्ज किए जा रहे ज्यादातर मामले कोर्ट में साबित नहीं कर पा रही है। इससे पुलिस की कार्यप्रणाली भी प्रभावित हो रही है। ऐसा क्यों हो रहा है, इसका अब अध्ययन करवाया जाएगा।

अध्ययन के आधार पर रणनीति बनेगी कि कैसे इन मामलों में जांच की जानी है। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग की ओर से मंगलवार को उपायुक्त कार्यालय में हुई बैठक में यह फैसला लिया गया। अनुसूचित जाति/जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम 1989 के तहत बुलाई जिला स्तरीय सतर्कता एवं प्रबोधन समिति की बैठक में रिपोर्ट पेश की गई कि जिले में अनुसूचित जाति/जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम 1989 के तहत 2018 से वर्तमान तक 40 मामले न्यायालयों में लंबित है।
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डीसी अनुपम कश्यप ने कहा कि सामाजिक सुरक्षा मुहैया करवाना प्रशासन की प्राथमिकता है। समाज में समानता लाने के लिए व्यावहारिक प्रयास किए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि समाज में विकास एक समान रूप से करवाना प्रशासन का लक्ष्य है। जिला पुलिस के सभी जांच अधिकारियों के लिए जल्द ही विशेष कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा। इस कार्यशाला में मामलों की प्रोसेसिंग की बेहतरी के लेकर प्रशिक्षण दिया जाएगा। बैठक में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संजीव कुमार गांधी, अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी कानून व्यवस्था पंकज शर्मा, जिला कल्याण अधिकारी कपिल शर्मा सहित अन्य गणमान्य मौजूद रहे।
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अल्पसंख्यकों के बच्चों को मिल रहीं सुविधाएं
प्रधानमंत्री के नए 15 सूत्रीय कार्यक्रम के तहत गठित जिला स्तरीय समिति की बैठक उपायुक्त अनुपम कश्यप की अध्यक्षता में आयोजित की गई। उपायुक्त ने कहा कि जिला शिमला में 2,154 आंगनबाड़ी केंद्र हैं जिनमें से 231 आंगनबाड़ी केंद्रों अल्पसंख्यकों के बच्चे पंजीकृत हैं। जिले में 2154 आंगनबाड़ी केंद्र में 0 से 6 वर्ष के अल्पसंख्यक समुदाय के 491 बच्चे पंजीकृत हैं जिनमें से 387 बच्चों को विशेष पोषण कार्यक्रम के तहत पोषण की सुविधा प्रदान की जा रही है।
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