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11 दिन बाद मलबे के नीचे पोकलेन में फंसा मिला रवि का शव

Fri, 24 May 2019 05:48 PM IST
अरविन्द ठाकुर प्रवीण कुमार, अमर उजाला, मंगला (चंबा)
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- फोटो : अमर उजाला
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चंबा-जोत मार्ग पर भटालवां नाला के समीप मलबे में दबे पोकलेन ऑपरेटर का शव बरामद कर लिया गया है। लोक निर्माण विभाग के सर्च ऑपरेशन में चालक रवि का शव मिला है। मशीन सहित रवि सड़क से करीब पचास मीटर नीचे नाले में मिला। पोकलेन मशीन दिखने के बाद मौके पर सैकड़ों लोग पहुंच गए। सूचना मिलते ही एसडीएम चंबा दीप्ती मंढ़ोत्रा भी मौके पर पहुंचीं।

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मशीनों के जरिये मलबे को हटाकर मशीन को निकाला गया। इसी मशीन में रवि फंसा था। शव को निकाल कर पोस्टमार्टम के लिए चंबा मेडिकल कॉलेज पहुंचाया गया। जहां शव का पोस्टमार्टम कर परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया। 

15 मई रात दो बजे मार्ग पर भटालवां नाला के समीप भारी भूस्खलन हुआ था। मलबे की चपेट में पोकलेन और ऑपरेटर रवि कुमार आ गया। मलबे की चपेट में एक पिकअप भी आई। पिकअप चालक ने किसी तरह अपनी जान बचा ली थी। एनडीआरएफ की टीम भी मौके पर बुलाई गई, लेकिन चालक और मशीन का कहीं पता नहीं चल सका था। 22 मई को एनडीआरएफ की टीम वापस हो गई थी। इसके बाद प्रशासन ने रेस्कयू का जिम्मा लोक निर्माण विभाग को सौंपा। 
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लोक निर्माण विभाग के अधिशाषी अभियंता जीत सिंह ठाकुर ने बताया कि मशीन सहित ऑपरेटर को तलाश लिया गया है। भटालावां नाले में सड़क से 50 मीटर नीचे मलबे के नीचे ऑपरेटर का शव मिला है। शव का पोस्टमार्टम करवाकर परिजनों के हवाले कर दिया गया है।

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आंखों में आंसू लिए 11 दिन भतीजे की तलाश में पोकलेन चलाता रहा चाचा

चंबा-जोत मार्ग पर मंगला के पास पहाड़ी दरकने से मलबे में दबे पोकलेन ऑपरेटर की तलाश में उसका चाचा पिछले 11 दिनों से आंखों में आंसू दिन रात पोकलेन मशीन चलाता रहा। रोजाना सुबह इसी आस में वह मशीन पर बैठता कि आज शायद उसे उसका भतीजा मिल जाएगा। लेकिन देर रात तक नाले से मलबा हटाने के बाद भी जब रात को उसे निराशा मिलती तो वह आंखों में आंसू भरकर दर्द को कम करने की कोशिश करता।

करीब 11 दिन तक वह भतीजे की तलाश करने के लिए लगातार पोकलेन मशीन चलाता रहा। जबकि अन्य मशीनों के ऑपरेटर उसे आराम करने के लिए भी बोलते लेकिन वह आराम करने की बजाए लापता भतीजे की तलाश में काम करता रहता था। उसके मन में यही उम्मीद थी कि मलबे में दबा उसका भतीजा शायद जिंदा होगा। इसलिए वह कोशिश करता रहता है कि जल्द उसे मलबे से ढूंढ निकाले।

लेकिन जैसे-जैसे दिन व्यतीत होने लगे उसकी आस भी टूटने लगी। पांच दिन के बाद जब एनडीआरएफ की टीम ने अपने हाथ खड़े कर दिए, तब उसकी उम्मीद भी टूटने लगी। लेकिन भतीजे के प्रति चाचा के प्यार ने कहीं न कहीं एक उम्मीद जगाई रखी। 11वें दिन सुबह के समय जब मलबे में दबी मशीन का एक हिस्सा नजर आया तो सबसे पहले लापता ऑपरेटर का चाचा भतीजे को देखने के लिए वहां पहुंचा।

जैसे ही मशीन से मलबा हटा तो उसका भतीजा वहां मृत अवस्था में पड़ा था। चाचा भतीजा लंबे समय से एक साथ काम कर रहे थे। उन्होंने मिलकर चंबा में ही कई सड़कें बनाई। हादसे के दौरान भी दोनों एक साथ काम कर रहे थे। इतना ही नहीं चाचे ने ही भतीजे को पोकलेन मशीन चलाना सिखाया था। यह सोच-सोच कर चाचा का रो-रो कर बुरा हाल है।
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