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IIAS को नई ऊंचाइयों पर देखना चाहते हैं मोदी

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आधी सदी का सफर तय कर चुके भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विशेष रुचि है। वे इस संस्थान को नई ऊंचाइयों पर देखना चाहते हैं। उन्होंने संस्थान के विभिन्न पहलुओं व आयामों को लेकर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए हैं।
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संस्थान की नव नियुक्त चेयरपर्सन प्रो. चंद्रकला पाडिया ने ‘अमर उजाला’ से विशेष बातचीत में कहा कि पीएम मोदी इस संस्थान में बेहद रुचि ले रहे हैं। उन्होंने संस्थान को लेकर रिपोर्ट तैयार करने को कहा है। इसमें विभिन्न क्षेत्रों में शोध और उस शोध की जनसाधारण तक पहुंच बनाने के उपाय तलाशने के लिए कहा है।

उन्होंने कहा कि पीएम मोदी यह कतई नहीं चाहते हैं कि संस्थान केवल बंद कमरों में भौतिक चर्चाओं तक ही सीमित रह जाए। वे अब तक यहां हुए और भविष्य में यहां होने वाले सभी शोध कार्यों को आम जनता के लिए सुलभ बनाने के हिमायती हैं। प्रधानमंत्री विभिन्न मंचों से अपने भाषणों में यह संकेत देते आए हैं कि वे ज्ञान को सभी देशवासियों तक पहुंचाना चाहते हैं।
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चंद्रकला के अनुसार प्रधानमंत्री के साथ उनकी संस्थान को लेकर प्रारंभिक बातचीत हो चुकी है। वे इस संस्थान के इतिहास और महत्व को लेकर खासे उत्साहित हैं। उन्होंने कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री स्मृति ईरानी भी इस संस्थान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विश्व के अग्रणी अनुसंधान संस्थानों में शुमार करना चाहती हैं। चंद्रकला सोमवार को दिल्ली लौट रही हैं और जाते ही प्रधानमंत्री से मुलाकात के लिए समय लेंगी।
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ऐतिहासिक महत्व है संस्थान का

देश के महान नेता और दूरदर्शी सोच वाले शिक्षाविद राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने ब्रिटिश काल में बनी इस इमारत का सदुपयोग सुनिश्चित करते हुए इसे उच्च अध्ययन संस्थान में रूपांतरित किया था। अक्तूबर 1964 में यह संस्थान उच्च अध्ययन के लिए देश को समर्पित किया गया।

पांच दशक के इस सफर में संस्थान में अनेक विषयों पर महत्वपूर्ण शोध हुए हैं। संस्थान से जुडे़ प्रमुख नामों में डॉ. कपिला वात्सयायन, हबीब तनवीर, महान दार्शनिक स्व. प्रो. दयाकृष्ण, भीष्म साहनी, कृष्णा सोबती, दूधनाथ सिंह जैसे कई नाम शामिल हैं। यहां विदेशी महिला अध्येता लेडी बेटिना ने संस्कृत भाषा में विभिन्न विषयों पर शोध किया।

पुस्तकालय में डेढ़ लाख से अधिक किताबें हैं और सभी के कैटालॉग भी ऑनलाइन है। गुरुग्रंथ साहिब पर लिखी हस्तलिखित संकलन भी यहां मौजूद हैं। इसके अलावा तिब्बती, संस्कृत, अरबी, फारसी, उर्दू सहित अनेक भाषाओं की दुर्लभ कृतियां संरक्षित हैं। संस्थान का अपना पब्लिकेशन हाउस भी है।

प्रो. चंद्रकला कहती हैं कि ऐसे बहुआयामी शोध संस्थान में प्रधानमंत्री की रुचि सहज ही बनती है। वह कहती हैं कि यह भवन (एडवांस्ड स्टडी) उच्चतर मानवीय चेतना से विचारों का स्रोत है।
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