लाहौल के सिस्सू में चंद्रा नदी के तट पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को एक तीर से दो लक्ष्य साधेंगे। अटल टनल का लोकार्पण कर वे सामने सीमा पर चीन और पाकिस्तान को अपनी ताकत का एहसास करवाएंगे तो लाहौल के लोगों और पर्यटकों को शेष दुनिया से जुड़ने का बारहमासी रास्ता देंगे।
सुरंग से मनाली से लेह की दूरी 46 किलोमीटर कम हो जाएगी। कोरोना काल में मोदी देश की तीसरी और अयोध्या के बाद दूसरी महत्वपूर्ण जनसभा लाहौल के सिस्सू में कर रहे हैं। यह जिला चीन शासित तिब्बत की सीमा पर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उस वायदे को भी पूरा करने जा रहे हैं जो पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी कर गए थे।
हालांकि, यह सही है कि इस सुरंग को बनाने का पहला सर्वे पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने भी करवाया था, जब 1983 में वह केलांग आई थीं, पर तब तकनीक ऐसी न थी कि जो पीर पंजाल पर्वत के पेट को चीर जाए। आजादी के बाद लाहौल जब पंजाब का हिस्सा था तभी से यह मांग उठ रही थी।
फिर जब तीन जून 2000 को तत्कालीन प्रधानमंत्री वाजपेयी ने केलांग पुलिस मैदान में इसकी घोषणा की तो उम्मीद बंध गई। उन्होंने इस सुरंग के दक्षिण मुहाने मनाली के पास धुंधी तक सड़क बनवा ली। आगे बढ़ते हुए इंदिरा के संकल्प को याद करवाकर 28 जून 2010 को सोनिया गांधी ने भी बतौर यूपीए अध्यक्ष इसका शिलान्यास करवाया। हालांकि, नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद ही इसके निर्माण को तेजी मिल पाई और यह महत्वाकांक्षी परियोजना पूरी हो पाई।