एप्पल स्टेट हिमाचल प्रदेश में पीएम मोदी के एक और दौरे पर बागवानों की उम्मीदें फिर जगा दी हैं। चुनाव से पहले और चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री ने प्रदेश के बागवानों के लिए कई घोषणाएं की थीं।
केंद्र के बाद अब जबकि राज्य में भी सत्ता भाजपा के हाथ आ रही है तो बागवानों के जेहन में पीएम के वायदे घूम रहे हैं। आज नई सरकार के ताजपोशी कार्यक्रम के दौरान बागवानों की निगाहें नए मुख्यमंत्री जयराम पर तो होंगी ही, पीएम मोदी पर भी आस भरी नजरें टिकी रहेंगी।
बेसब्र होकर वे इंतजार में हैं कि ताजपोशी के वक्त पीएम इन वायदों पर अमल को लेकर कुछ कहें। दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2014 के संसदीय चुनावों से पूर्व पालमपुर, मंडी और सोलन में रैलियां कर विदेशी सेब पर अंकुश लगाने का वायदा किया था।
अब तो वायदों पर अमल होना चाहिए।
केंद्र में सरकार बनने के बाद से यह मामला अब भी अधर में ही है। पीएम मोदी ने इसके बाद भी अपने हिमाचल दौरों में बागवानों से वायदे दोहराए। इनमें खासतौर पर आयात शुल्क बढ़ाने के बजाय बोतलबंद कोल्ड ड्रिंक में नेचुरल फ्रूट जूस को अनिवार्य बनाने पर जोर दिया गया।
विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान भी इन वायदों को फिर दोहराया गया। अब बागवान वायदों के पूरा होने का इंतजार कर रहे हैं। केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय की एजेंसी एपेडा के निदेशक मंडल के सदस्य रह चुके बागवान कुलदीप सिंह राठौर कहते हैं, पीएम मोदी ने अब तक सिर्फ वायदे किए हैं।
केंद्र के बाद राज्य में भाजपा की सरकार बन रही है। अब तो वायदों पर अमल होना चाहिए। हिमाचल प्रदेश फल एवं सब्जी उत्पादक संघ के अध्यक्ष हरीश चौहान ने कहा, बागवानों के लिए की गईं पीएम मोदी की घोषणाएं कब पूरी होती हैं, सभी की इस पर नजर है।
कब-कहां की गईं घोषणाएं
29 अप्रैल 2014 - पालमपुर, मंडी और सोलन में रैलियों के दौरान विदेशी सेब पर आयात शुल्क पर जोर
18 अक्तूबर 2016 - मंडी में रैली के दौरान बोतलबंद कोल्डड्रिंक में पांच फीसदी नेचुरल फ्रूटजूस का वायदा
27 अप्रैल 2017 - शिमला के रिज मैदान पर रैली में कहा, कोल्डड्रिंक में कच्चे-पके फलों का जूस अनिवार्य किया गया। नागपुर में संतरा उत्पादकों को लाभ मिल रहा है। हिमाचल के फल उत्पादकों तक जल्द पहुंचेगा फायदा।
40 देशों से आ रहा सेब बना चुनौती
हिमाचल के सेब बागवान लंबे अरसे से आयात शुल्क को बढ़वाने या इसे मौजूदा वक्त से कम नहीं होने देने की बात कर रहे हैं। अमेरिका, चीन समेत 40 देशों से आ रहा सेब चुनौती बन गया है। विदेशी सेब पर आयात शुल्क करीब 50 फीसदी है।
दोहा राउंड में डब्ल्यूटीओ की बैठक में अगर सेब को विशेष उत्पाद की श्रेणी में नहीं रखा गया तो ये शुल्क 50 फीसदी से घटकर शून्य भी हो सकता है। यानी विदेशों से सेब का आयात पूरी तरह से निशुल्क हो जाएगा।
अगर ऐसा होगा तो हिमाचल में सेब कारोबार चौपट हो जाएगा। प्रदेश में करीब 3500 करोड़ रुपये का सेब का सालाना कारोबार है। करीब एक लाख बागवान परिवार सीधे तौर पर सेब बागवानी से जुड़े हैं।