शिमला। प्लास्टिक प्रदूषण हर कोने में व्याप्त है। माइक्रो प्लास्टिक के रूप में यह हमारे शरीर में भी प्रवेश कर चुका है। प्लास्टिक का कूड़ा माउंट एवरेस्ट से लेकर समुद्र की सतह से 10,900 मीटर नीचे समुद्री मारियाना ट्रेंच तक फैला है।
विज्ञापन
यह बात विश्व पर्यावरण दिवस पर हिमालयन वन अनुसंधान संस्थान पंथाघाटी में चलाए सफाई अभियान के दौरान आयोजित जागरुकता रैली में वैज्ञानिक एवं विस्तार प्रमुख डॉ. विनीत जिस्टू ने कही। इस अवसर पर संस्थान के लगभग 70 वैज्ञानिक, अधिकारियों, कर्मचारियों और परियोजना स्टाफ ने भाग लिया। प्रतिभागियों ने संस्थान से सटे जंगल में जाकर प्लास्टिक रैपर, बोतलें और अन्य गैर-बायोडिग्रेडेबल कचरा एकत्रित कर साफ-सफाई की। संस्थान के निदेशक डॉ. संदीप शर्मा ने कहा कि प्लास्टिक का अत्यधिक उपयोग न केवल पारिस्थितिकी तंत्र को क्षति पहुंचा रहा है, बल्कि यह मानव स्वास्थ्य के लिए भी घातक होता जा रहा है। वैज्ञानिक विनीत जिस्टू ने लोगों से अपील की कि वह प्लास्टिक और अन्य कचरे को खुले में फेंकना बंद करें। संवाद