हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में बुधवार को फारेस्ट प्लस कार्यक्रम की शुरूआत की गई। प्रधान मुख्य अरण्यपाल आरके गुप्ता ने पोर्टमोर स्कूल से इसका शुभारंभ किया। बाद में जंगलात महकमा और अफसर और यूनाइटेड स्टेट एजेंसी फार इटरनेशनल डेवलपमेंट के अफसर मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह और वन मंत्री ठाकुर सिंह भरमौरी से मिलकर पूरी योजना के बारे में जानकारी दी।
मुख्यमंत्री को इन प्रतिनिधियों ने बताया कि फारेस्ट प्लस कार्यक्रम का उद्देश्य प्रदेश में वन प्रबंधन एवं कार्बन अधिग्रहण में सुधार लाकर ऐसे प्रयास आरंभ करना है। वनों पर आश्रित समुदाय वन रोपण गतिविधियों में भाग लें। साथ ही जलवायु परिवर्तन से लड़ने में जो पौधे मददगार होंगे।
उसी प्रजाति के पौधे लगाए जाएंगे। केवल शिमला जिले में तकरीब 15 हजार छात्रों से ऐसा पौधारोपण करने का लक्ष्य तय किया गया है। वीरभद्र सिंह ने कहा कि प्रदेश की वन संपदा को पुन: विकसित करना उनका लक्ष्य है। प्रदेश सरकार पेड़ों के वैज्ञानिक कटान की अनुमति न देने के लिए भी प्रतिबद्ध है।
प्रधान मुख्य अरण्यपाल आरके गुप्ता ने मुख्यमंत्री को अवगत करवाया कि सिक्किम, मध्यप्रदेश तथा कर्नाटक के बाद हिमाचल देश का चौथा राज्य है, जिसे यूएसएआईडी ने वृहद पौधरोपण कार्यक्त्रस्म के लिए चुना है।
प्रदेश में चौड़ी पत्ती वाले पेड़ लगाए जाएंगे ताकि कार्बन उत्सर्जन में कमी लाई जा सके। एजेंसी के वरिष्ठ वानिकी सलाहकार डॉ. वर्गिज पॉल, संयुक्त राज्य अमेरिका के प्रतिनिधि श्री क्त्रिस्स्टोफर कैरेनन सहित अन्य मौजूद थे।