हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र को बीच में स्थगित करने के सरकार के फैसले को भाजपा ने अलोकतांत्रिक करार दिया है। नेता प्रतिपक्ष प्रेम कुमार धूमल के नेतृत्व में भाजपा विधायकों ने बुधवार को राज्यपाल उर्मिला सिंह से मुलाकात करके विधानसभा भंग करने का अनुरोध किया।
इतना ही नहीं बल्कि राज्यपाल के माध्यम से राष्ट्रपति को भी ज्ञापन प्रेषित किया, जिसमें हिमाचल प्रदेश विधानसभा भंग करके नए सिरे से चुनाव कराने का उल्लेख किया गया है।
राज्यपाल को ज्ञापन देने के बाद राजभवन के बाहर मीडिया से बातचीत करते हुए नेता प्रतिपक्ष प्रेम कुमार धूमल ने कहा कि विस के मानसून सत्र में 11 अगस्त तक विधानसभा सत्र में 754 तारांकित प्रश्न लगाए गए थे।
विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिशः धूमल
पूर्व सीएम ने कहा कि सदन में 150 अतारांकित सवाल लगाए गए थे। चार ध्यानाकर्षण प्रस्ताव, दो प्रस्ताव, तीन गैर सरकारी सदस्य संकल्प, नियम 130 के तहत 10 प्रस्ताव प्राप्त हुए थे। इस पर सत्र में चर्चा होनी थी।
इसके अलावा लोकायुक्त और टीसीपी विधेयक पर सदन में चर्चा होनी थी, लेकिन सत्र को बीच में अनिश्चितकालीन के लिए स्थगित कराकर सरकार ने लोकतंत्र की हत्या करने का काम किया है। विपक्ष के आवाज को दबाने की कोशिश की है।
जनता की समस्याओं को सदन में उठाने से बचने का काम किया है। सत्र में भाजपा की ओर से रूसा पर सहित तमाम गंभीर मुद्दों को सदन में उठाया जाना था, लेकिन सरकार ने ऐसा नहीं करने दिया।
सरकार ने बनाया सदन का मजाक
धूमल ने कहा कि सरकार के इस कृत्य से लोकतांत्रिक मूल्यों का हनन हुआ है। इस कदम से सामंतवादी प्रवृति झलकती है। उन्होंने कहा कि कृषि मंत्री सुजान सिंह पठानिया, पशुपालन मंत्री अनिल शर्मा और राजस्व मंत्री कौल सिंह ठाकुर सवालों का जवाब देने के बजाए सदन से उठकर बाहर चले जा रहे थे।
हर सवाल का जवाब केवल मुख्यमंत्री की ओर से दिया जा रहा था। सत्ता पक्ष ने सदन को मजाक बनाकर रख दिया था, जो आज से पहले कभी नहीं हुआ। इन तमाम स्थितियों को देखते हुए राज्यपाल से विधानसभा को भंग करने की मांग की गई।
जेल में बंद राम कुमार के मामले को भी धूमल ने राज्यपाल के समक्ष उठाया। ज्ञापन देने वालों में गुलाब सिंह ठाकुर, ईश्वर धीमान, सतपाल सत्ती, रणधीर शर्मा, सुरेश भारद्वराज सहित सभी 27 विधायक मौजूद थे।