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Shimla: धूमल बोले- आरडीजी बंद होना नई बात नहीं, वर्षों पहले से तय था, आर्थिक संकट का समाधान भाषण नहीं

Mon, 09 Feb 2026 05:58 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।

सार

प्रो. प्रेम कुमार धूमल ने प्रदेश की वर्तमान आर्थिक स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि हिमाचल में जो वित्तीय संकट की चर्चा हो रही है, वह अचानक उत्पन्न हुई स्थिति नहीं है। 
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पूर्व मुख्यमंत्री प्रो. प्रेम कुमार धूमल - फोटो : अमर उजाला
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पूर्व मुख्यमंत्री प्रो. प्रेम कुमार धूमल ने प्रदेश की वर्तमान आर्थिक स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि हिमाचल में जो वित्तीय संकट की चर्चा हो रही है, वह अचानक उत्पन्न हुई स्थिति नहीं है। बल्कि इसके संकेत वर्षों पहले ही स्पष्ट हो चुके थे। उन्होंने कहा कि आरडीजी के चरणबद्ध समाप्त होने की जानकारी पहले से थी। इसके बावजूद सरकार ने समय रहते वैकल्पिक संसाधन जुटाने और वित्तीय प्रबंधन की ठोस योजना नहीं बनाई। धूमल ने कहा कि वित्त आयोग की रिपोर्ट में पहले ही स्पष्ट कर दिया गया था कि 31 मार्च 2026 के बाद आरडीजी समाप्त हो जाएगी। यह कोई नई घोषणा नहीं है। जब यह बात वर्षों पहले से ज्ञात थी, तो सरकार को उसी अनुसार अपनी नीतियां, खर्च और आय के स्रोत तय करने चाहिए थे।

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वित्त आयोग की सिफारिशों को लागू करना केंद्र सरकार का दायित्व होता है। इसलिए इस विषय पर भ्रम फैलाने के बजाय राज्य सरकार को अपनी तैयारी पर जवाब देना चाहिए। आर्थिक संकट हर संसाधन सीमित राज्य में आता है, लेकिन समझदारी यह है कि उससे निपटने के लिए समय पर कठोर निर्णय लिए जाएं। अपने कार्यकाल का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जब भी कठिन आर्थिक परिस्थितियां आईं, तब सरकार ने बचत और वित्तीय अनुशासन का रास्ता अपनाया। मुख्यमंत्री और मंत्रियों के खर्चों पर नियंत्रण लगाया गया, अनावश्यक यात्रा और सुविधाओं में कटौती की गई। सब्ज़ी उत्पादन और विपणन को बढ़ावा देकर जहां पहले लगभग 250 करोड़ का कारोबार होता था, उसे बढ़ाकर लगभग 2250 करोड़ तक पहुंचाया गया। सेब उत्पादन में आई गिरावट की भरपाई वैकल्पिक कृषि से की गई, जिससे राजस्व में उल्लेखनीय सुधार हुआ और बजट संतुलन में मदद मिली।

उन्होंने कहा कि एक ओर आर्थिक संकट की बात की जा रही है, दूसरी ओर बड़ी संख्या में चेयरमैन, सलाहकार और पदाधिकारी नियुक्त किए जा रहे हैं, जिन पर भारी खर्च हो रहा है। नई गाड़ियों की खरीद, अतिरिक्त स्टाफ और सुविधाओं पर व्यय यह सब वित्तीय अनुशासन के विपरीत है। यदि सचमुच स्थिति कठिन है तो सबसे पहले गैर जरूरी खर्चों पर रोक लगनी चाहिए।
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मुखिया खजाना खाली की बात करें तो जन विश्वास होता कमजोर
धूमल ने कहा कि प्रदेश का मुखिया यदि बार-बार यह कहे कि खजाना खाली है, तो इससे जनविश्वास कमजोर होता है। आवश्यकता इस बात की है कि सरकार ठोस कदम उठाए, खर्चों की समीक्षा करे, प्राथमिकताएं तय करे और वित्तीय प्रबंधन को मजबूत बनाए। आर्थिक चुनौतियों का समाधान जिम्मेदार निर्णयों और अनुशासित शासन से ही संभव है।
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