पवित्र डलझील की परिक्रमा करने के बाद दोपहर बाद दो बजे शिव चेलों ने झील को पार किया। इस दौरान भक्तों ने बम-बम भोले के जयकारे लगाते हुए माहौल को भक्तिमय बना दिया। मणिमहेश में राधाष्टमी पर शाही स्नान (न्हौण) सोमवार रात को 12 बजकर 37 मिनट पर शुरू हुआ।
यह मंगलवार रात को 2 बजकर 53 मिनट तक चलेगा। इससे पहले सोमवार दोपहर करीब एक बजे त्रिलोचन महादेव संचूई गांव के शिव चेले पवित्र डलझील पहुंचे। इनकी अगुवाई कार्तिक स्वामी का चेला करता है। पवित्र डलझील की तीन बार परिक्रमा करने के बाद दो बजे शिव चेलों ने डल झील को पार किया।
इनके डल झील पार करने के बाद दूसरे छोर पर श्रद्धालुओं ने उन्हें कंधों पर उठाकर एक निर्धारित जगह पहुंचाया। यहां संचूई के चेलों ने श्रद्धालुओं को आशीर्वाद दिया। राधाष्टमी पर होने वाले शाही स्नान (बडे़ न्हौण) के लिए त्रिलोचन महादेव संचूई गांव के शिव चेले 25
अगस्त को संचूई से चौरासी के लिए प्रस्थान करते हैं। 25 और 26 अगस्त को चौरासी परिसर स्थित शिव मंदिर की चौखट पर डेरा जमाते हैं। 27 अगस्त की शाम को चेले हड़सर स्थित शिव मंदिर में रुकते हैं। 28 अगस्त की सुबह शिव चेले मणिमहेश डल की तरफ कूच करते हैं।
चतुर्थमुखी शिवलिंग के साथ स्थापित की छड़ी
सप्तमी तिथि दोपहर एक बजे संचूई गांव के चेले, दशनामी अखाड़ा से लाई गई छड़ी, चरपट नाथ चंबा से लाई गई चरपट नाथ की छड़ी और महंत एकसाथ डलझील पहुंचे।
इसके बाद दशनामी अखाड़ा मोहल्ला जनसाली से लाई गई छड़ी और चरपट नाथ चंबा से लाई गई छड़ी को डलझील के पास स्थित चतुुर्थमुखी शिवलिंग के साथ स्थापित किया गया।
50 हजार शिव भक्तों के पहुंचने का अनुमान
प्रशासन ने राधाष्टमी पर स्नान के लिए सोमवार शाम तक 50 हजार शिवभक्तों का डलझील पहुंचने का अनुमान लगाया है। मान्यता है कि जैसे ही शाही स्नान का पर्व आरंभ होता है, उसी समय डल झील में मिलने वाले प्राकृतिक स्रोत का जलस्तर बढ़ना शुरू हो जाता है।
यह राधाष्टमी के दौरान लगने वाली पर्वी के खत्म होने तक जारी रहता है। पंडित विपन शर्मा ने बताया कि इस बार शाही स्नान के लिए शुभ मुहूर्त 26 घंटों का रहेगा। राधाष्टमी पर लाखों शिवभक्त पवित्र डल में डुबकी लगाते हैं। एडीएम भरमौर विनय धीमान ने बताया की प्रशासन ने तैयारियां पूरी कर ली हैं।