शहर में तीन दिन से नहीं उठा कचरा, घरों में फैल गई दुर्गंध, सड़कों और गलियों में लगे ढेर
सुपरवाइजरों को तनख्वाह न मिलने पर सैहब के कर्मचारियों ने की हड़ताल
राजधानी में तीन दिन से घरों और गलियों से कचरा नहीं उठने के कारण हालात बिगड़ने लगे हैं। सैहब कर्मचारियों की हड़ताल के चलते जगह-जगह कचरे के ढेर लगे हैं। खासकर गीले कचरे के सड़ने से दुर्गंध फैल रही है। इससे लोगों का घरों से निकलना भी मुश्किल हो गया है। संवाददाता सुमित ठाकुर ने रविवार को शहर का जायजा लिया। शहर के कई वार्डों में घराें और दुकानों के बाहर कूड़े के ढेर लगे मिले। पेश है रिपोर्ट...
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राजधानी में सफाई कर्मचारियों की हड़ताल के चलते सफाई व्यवस्था पटरी से उतर गई है। वीकेंड पर रविवार को शहर के बाजारों, गलियों और सड़कों पर जगह-जगह कचरे के ढेर लगे रहे। बंदरों और कुत्तों ने कचरे को इधर-उधर बिखेर दिया। इससे लोगों का पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है।
घरों में जमा गीला कचरा अब सड़ने लगा है। इससे दुर्गंध फैलने लगी है। इसके साथ ही मक्खी-मच्छरों की संख्या भी बढ़ने लगी है। यदि हालात ऐसे ही बने रहे तो लोगों के बीमार पड़ने की आशंका भी बढ़ सकती है। कई जगहों पर घरों की गलियों में कचरे के ढेर जमा हो गए हैं। लोगों का कहना है कि यदि जल्द कचरा नहीं उठाया गया तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। कुछ स्थानों पर लोग मजबूरी में कचरा खुले स्थानों पर डालने लगे हैं।
पटियोग वार्ड में रमेश शर्मा ने बताया कि तीन दिनों से कचरा नहीं उठाया गया है। गीले कचरे के कारण इलाके में बदबू फैल गई है। बोरी में रखा कचरा बिखरने से गंदगी बढ़ती जा रही है। इससे पूरा वार्ड प्रभावित हो रहा है। विकासनगर के दीपक चौहान ने बताया कि सुबह-शाम घर से बाहर निकलना भी मुश्किल हो रहा है। संजौली के विवेक और सीमा देवी का कहना है कि घरों में कचरा लगातार जमा हो रहा है। अब उसे रखने के लिए भी जगह नहीं बची है।
लोगों का कहना है कि यदि जल्द सफाई व्यवस्था बहाल नहीं हुई तो बीमारियां फैलने का खतरा बढ़ जाएगा। ढली के विजय ने बताया कि नगर निगम को कर्मचारियों की हड़ताल का जल्द समाधान निकालना चाहिए, ताकि शहर में नियमित रूप से सफाई व्यवस्था बहाल हो सके। बता दें कि शहर में मंगलवार और शुक्रवार को ही सूखा कचरा उठाया जाता है, जबकि रविवार को छोड़कर अन्य दिनों में गीला कचरा उठाया जाता है। पिछले तीन दिनों से गीला कचरा नहीं उठने के कारण लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
सूखा और गीला कचरा उठाता है निगम
नगर निगम शहर में मुख्य रूप से रोजाना सूखे और गीले कचरे को उठाने का काम करता है। सप्ताह में रविवार को छोड़कर सोमवार, बुधवार, वीरवार और शनिवार को नियमित रूप से गीला कचरा उठाया जाता है। इसमें सब्जियों और फलों के छिलके, पका और बचा हुआ भोजन, अंडे के छिलके, चिकन व मछली की हड्डियां, सड़े फल-सब्जियां, गंदा टिश्यू पेपर, चाय बैग, चाय की पत्ती, पत्तों के प्लेट, नारियल के छिलके, गिरी हुई पत्तियां, टहनियां, पूजा के फूल, मालाएं और घास आदि शामिल होते हैं। यह कचरा एक दिन भी घर में रह जाए तो रसोई में परेशानी पैदा हो सकती है।
सूखा कचरा नीले कूड़ेदान में रखें
नगर निगम लोगों से अपील करता है कि सूखे कचरे जैसे प्लास्टिक कवर, बोतलें, बक्से, चिप्स और टॉफी के पैकेट, प्लास्टिक कप, दूध और दही के पैकेट, कोल्डड्रिंक के खाली डिब्बे, रबर, थर्मोकोल, पुराने कपड़े, डस्टर, स्पंज, लकड़ी के टुकड़े, बाल, स्टेशनरी, अखबार, गत्ते और पिज्जा के डिब्बे, टेट्रा पैक, पेपर कप और प्लेट्स आदि को नीले कूड़ेदान में डालें, ताकि इनके निष्पादन में आसानी हो सके।
हानिकारक कचरा लाल कूड़ेदान में रखें
ई-कचरा जैसे प्रिंटर, प्रिंटर की स्याही, इलेक्ट्रॉनिक पुर्जे, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, रसायन, रसायनों के खाली डिब्बे, पेंट, तेल, थिनर, कीटनाशक और उनके खाली डिब्बे लाल कूड़ेदान में डालने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा घरेलू चिकित्सा अपशिष्ट जैसे थर्मामीटर, त्यागी हुई दवाइयां, सेनेटरी वेस्ट और डायपर भी लाल कूड़ेदान में डालने को कहा गया है, ताकि इनके निपटान में आसानी हो और सफाई कर्मचारियों को स्वास्थ्य जोखिम न हो।
कर्मचारियों को मिल रही तनख्वाह
कर्मचारियों ने तनख्वाह का मुद्दा उठाया था। इसे सुलझा दिया गया है। सोमवार को सभी सुपरवाइजरों की तनख्वाह बनने के बाद खातों में आ जाएगी।
-सुरेंद्र चौहान, महापौर, नगर निगम शिमला