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करोड़ों की टैक्स चोरी का भंडाफोड़, पांच करोड़ लगेगा जुर्माना

Mon, 15 Jan 2018 10:41 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, बद्दी/मंडी
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फार्मा हब बद्दी में करोड़ों की टैक्स चोरी का भंडाफोड़ हुआ है। क्षेत्र के एक बड़े दवा उद्योग की ओर से 50 करोड़ की दवाइयों में टैक्स में हेराफेरी की है। सरकार की ओर से तय टैक्स में छूट के तहत सी फॉर्म में दर्शाई रकम में टेंपरिंग का मामला सामने आया है।

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आबकारी एवं कराधान विभाग के दक्षिणी प्रवर्तन क्षेत्र की टीम ने जांच के बाद सी फार्मों को फोरेंसिक लैब जुन्गा भेजा। टेंपरिंग की पुष्टि होने के बाद उद्यमी को 3.85 करोड़ टैक्स व ब्याज भरने के आदेश जारी किए गए हैं।

अब विभाग अलग से पांच करोड़ जुर्माना लगाने की तैयारी में है। यह दवाइयां मंडी समेत प्रदेश भर में सप्लाई हुई हैं। इस मामले का खुलासा उस समय हुआ जब इस दवा उद्योग के नाम के एक अन्य व्यापारी की रिटर्न खंगाली गई।
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रिटर्न देखने पर पता चला कि उसकी बिक्री का बड़ा हिस्सा टैक्स फ्री दिखाया जा रहा है। हिमाचल में लगभग सभी प्रकार की दवाइयों पर 5 फीसदी की दर से टैक्स लगता है।

दवा उद्योग की ओर से कर मुक्त सामान बेचा जाना इस उद्योग को संदेह के घेरे में ले आया और जांच में खुलासा हुआ।

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उद्यमी अपनी ही दलील में फंसा

उद्यमी ने दलील दी कि उसकी औद्योगिक इकाई में सेफ़ा समूह की दवाइयां भी बनाई जाती हैं जो पूर्णतया कर मुक्त हैं। जब उद्योगपति से दवाइयों को कर मुक्त घोषित करने की अधिसूचना देने को कहा तो उद्योगपति पलट गया और फंस गया। जांच टीम ने उद्योगपति के सी फॉर्म की जांच की तो कच्चा चिट्ठा खुल गया। 

सी फार्म से ऐसे हुई तस्वीर स्पष्ट 
उद्योग के उत्पादन की आधी दवाइयां सी फॉर्म से बाहरी राज्यों में बेची जाती थीं। उद्योगपति ने अपने वास्तविक अंतरराज्यीय व्यापार में प्राप्त किए असली फॉर्मों पर दर्शाई गई रकम के अंकों में कुछ अंक जोड़कर उसे बढ़ा डाला। ताकि ये पेश कर सकते कि कर मुक्त दवाइयां भी फॉर्मों के जरिये बेची गई थीं। फोरेंसिक प्रयोगशाला जुन्गा (शिमला) में तस्वीर साफ हो गई। 

तथ्य सामने रखे तो उद्योगपति ने मानी गलती
उप आबकारी एवं कराधान आयुक्त डॉ. सुनील कुमार ने टैक्स चोरी की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि जब तथ्यों को उद्योगपति के सामने रखा तो उसने तुरंत अपनी गलती स्वीकार कर टैक्स अदा करने की हामी भर दी।

पिछले पांच वर्षों में लगभग 50 करोड़ की दवाइयों पर टैक्स की चोरी हुई है। एक माह में पूरी राशि 3 करोड़ 85 लाख जमा करवाने का समय दिया है। उद्योगपति को 5 करोड़ तक जुर्माना भी लगाया जा सकता है।
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