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पीएचडी टॉपर ने आखिर क्यों मांगी इच्छा मृत्यु!

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मुझे नौकरी दो या फिर इच्छा मृत्यु। कुदरत के आगे लाचार एक पीएचडी डिग्री धारक सरकार से यही गुहार लगा रही है। टॉपर होने के बावजूद युवती पिछले कई सालों से दर-दर की ठोकरें खा रही है। योग्यता होने के बावजूद उन्हें नौकरी नहीं मिल रही।
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उनके साथ पढ़े लोग नौकरी लगने के बाद उनका साक्षात्कार लेने लगे हैं। यहां तक कि वह मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह से भी कई मिलकर उनसे नौकरी की गुहार लगा चुकी हैं। सुंदरनगर की शैलजा अधरंग की शिकार हैं। पीएचडी की पढ़ाई के दौरान उन्हें अधरंग का दौरा पड़ा था।

दायां हिस्सा काम नहीं करता

उनके शरीर का दायां हिस्सा बेकार हो गया, मगर उन्होंने बाएं हाथ से लिखना शुरू कर अपना शोधग्रंथ तैयार किया। पीएचडी की परीक्षा में बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय सोलन में टॉप किया।

सुंदरनगर के भोजपुर निवासी शैलजा कश्यप ने अपने इसी संघर्ष के बलबूते मिसाल पेश की। सात वर्ष पहले उनके सिर से बाप का साया उठ गया। एक वर्ष पूर्व ही मां की देख-रेख करने वाला उनका भाई भी ईश्वर को प्यारा हो गया।

घर में अकेली बूढ़ी मां को भयंकर मानसिक बीमारी ने घेर लिया। वह सब कुछ भूल जाती हैं।

पति भी है बेरोजगार

ऐसे माहौल में शैलजा अपने पति के घर में नहीं रह पा रही हैं। मात्र आठवीं पास बेरोजगार पति के साथ बेसुध मां की सेवा में ही दिन-रात जुटी हैं। ऐसे में डाक्टर की उपाधि प्राप्त डा. शैलजा को बिना नौकरी और आय का दूसरा कोई साधन नहीं है।

सरकार से नौकरी के लिए आखिरी गुहार लगा रहीं शैलजा कहती हैं कि पीएचडी में गोल्ड मेडल हासिल करने और नेट की परीक्षा पास करने के बावजूद प्रदेश की इस शारीरिक रूप से 50 प्रतिशत चुनौती प्राप्त स्कॉलर को निजी क्षेत्र में भी कोई नौकरी देने को तैयार नहीं है।
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स्मृति ईरानी को लिखेंगी पत्र

प्रदेश सरकार से अब तक मिली घोर निराशा के बाद अब नई सरकार की कार्यशैली को देख कुछ हद तक उम्मीद बांधे शैलजा ने मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी को पत्र लिखकर अपनी आखिरी इच्छा जाहिर करने का मन बनाया है।

उन्होंने कहा कि यह उनका आखिरी प्रयास होगा और वह अब काफी थक चुकी हैं।
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