सत्र न्यायाधीश दविंदर कुमार की अदालत का फैसला संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। जिला अदालत ने चेक बाउंस मामले में निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए दोषी रमेश कुमार को 26 मार्च 2025 तक ट्रायल कोर्ट के समक्ष आत्मसमर्पण करने के आदेश दिए हैं।
याचिकाकर्ता दोषी रमेश कुमार ढली निवासी और मूलत: तहसील ठियोग निवासी ने अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के फैसले के खिलाफ अपील दायर की थी। सत्र न्यायाधीश दविंदर कुमार की अदालत ने अपील को खारिज करते हुए यह फैसला सुनाया है। दरअसल 3 फरवरी 2016 को दोषी ने मालरोड स्थित बैंक ऑफ इंडिया से गांव में जेसीबी खरीदने के लिए ऋण लिया था। आरोपी ने ऋण राशि पर प्रति वर्ष ब्याज का भुगतान करने पर सहमति व्यक्त की थी। लेकिन ऋण के वितरण के बाद आरोपी ऋण राशि चुकाने में विफल रहा। 28 मार्च 2017 को आरोपी ने ऋण खाता बंद करने पर सहमति व्यक्त की और ऋण खाते की संतुष्टि के लिए 19,60,859 लाख रुपये का चेक जारी किया था लेकिन खाते में धन अपर्याप्त होने के कारण केनरा बैंक से चेक बाउंस हो गया। इसके बाद आरोपी को राशि के भुगतान के लिए कानूनी नोटिस जारी किया। 31 मार्च 2017 को निर्धारित समय में कर्ज न चुकाने पर शिकायतकर्ता ने एनआई एक्ट के तहत प्रथम श्रेणी मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष केस दायर किया था। अदालत में दोनों पक्षों को सुनने और सबूतों के अवलोकन पर 13 जून 2024 को आरोपी को दोषी ठहराया था और उसे छह महीने का कारावास और 25 लाख रुपये का मुआवजा देने की सजा सुनाई थी। सत्र न्यायाधीश ने आरोपी को पारित सजा को भुगतने के लिए जमानत बांड के साथ आत्मसमर्पण करने के निर्देश दिए हैं।