हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय और कॉलेजों में बढ़ाई फीसों को लेकर विवि प्रशासन की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है। छात्रों के बाद अब जनता ने भी इस प्रस्ताव को नकार दिया है। लोगों ने एक साथ फीस में इतना इजाफा करना गलत बताया है।
20 सितंबर को सेवानिवृत्त जज की अध्यक्षता में गठित तीन सदस्यीय कमेटी को ई-मेल, फैक्स और कार्यालय में अब तक 26 संस्थाओं, आम लोगों ने आपत्तियां और सुझाव भेजे हैं। अब तक आई आपत्तियों में लोगों ने एक मुश्त फीस बढ़ोतरी के फैसले को गलत करार दिया है।
इसे कम करने के सुझाव भी दिए हैं। ऐसे में अब विवि प्रशासन पर फीस कम करने का दबाव बढ़ गया है।
गरीब छात्रों को राहत देने की मांग
कुछ पत्रों और ई-मेल से प्रदेश की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों, गरीबी रेखा से नीचे रह रहे लोगों की आर्थिक स्थिति को देखकर फीस तय करने के सुझाव दिए हैं।
अधिकतर लोगों ने फीस बढ़ाने के फैसला वापस लेने और इस पर पुनर्विचार कर जायज फीस स्ट्रक्चर तैयार करने की कमेटी से मांग की है। कुछ पत्रों में हर परिवार की आर्थिक स्थिति ध्यान में रखकर फीस तय करने की बात कही है।
सुझाव दिए हैं कि बीपीएल, अंत्योदय जैसे वर्ग के लोगों के लिए फीस कम की जाए। यदि प्रशासन इन पहलुओं पर विचार करता है तो जल्द ही फीस कम हो सकती है।
वीरवार शाम तक का दिया था समय
फीस बढ़ोतरी के मामले में गठित तीन सदस्यीय कमेटी ने वीरवार तक आपत्तियां और सुझाव देने का समय दिया था। सेवानिवृत्त जज वीके शर्मा की अध्यक्षता में गठित कमेटी को ई-मेल के अलावा लिखित में में भी सुझाव आए हैं। शुक्रवार सुबह दस बजे से कमेटी निजी शिक्षण संस्थान नियामक आयोग कार्यालय में आम पब्लिक का पक्ष सुनेगी।
आज साफ होगी स्थिति : कुलसचिव
हाई पॉवर कमेटी के सचिव विवि के कुलसचिव प्रो. मोहन झारटा ने कहा कि ई-मेल, फैक्स और कार्यालय में कितने सुझाव और आपत्तियां आईं, यह स्थिति शुक्रवार को साफ हो सकेगी।