बिना वैक्सीनेशन बच्चों को स्कूल भेजने को तैयार नहीं अभिभावक
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शहर के निजी स्कूलों के बच्चों के अभिभावकों ने डीसी को सौंपा मांगपत्र
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बोले, दस दिन के लिए स्कूल खोलकर क्या कर लेगी सरकार
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी शिमला के निजी स्कूलों को खोले जाने का अभिभावकों का विरोध जोर पकड़ चुका है। शुक्रवार को राजधानी के अधिकतर निजी और कान्वेंट स्कूलों के अभिभावकों ने एकजुट होकर एडीएम शिमला के माध्यम से सरकार को मांगपत्र भेजा।
छात्र-अभिभावक मंच के बैनर तले एकत्र हुए अभिभावक विवेक कश्यप, बालक राम, रंजीव कुठियाला, अनिल ठाकुर, किशोरी डढवालिया, विरोचन शर्मा, रुचि जिन्ना, अमित कुमार, विकास और अन्य लोगों ने अपने बच्चों को बिना वैक्सीनेशन के स्कूल न भेजने की बात कही। विवेक कश्यप ने कहा कि कोरोना से लगातार मौतें हो रही हैं, ऐसे में सरकार छोटे बच्चों के लिए महज दस दिन के लिए स्कूल खुलवाकर क्या साबित कर रही है। पहली से आठवीं कक्षा तक के बच्चे कैसे स्कूलों में अपना ख्याल रख पाएंगे।
उन्होंने कहा कि शिमला के अधिकतर स्कूलों की वार्षिक परीक्षाएं शुरू होने वाली हैं। बच्चे दो सालों से ऑनलाइन पढ़ाई करने के बाद ऑफलाइन परीक्षाएं देने के लिए मानसिक रूप से तैयार नहीं हैं। मंच के संयोजक विजेंद्र मेहरा और सदस्य विवेक कश्यप ने कहा कि स्कूल खोलने के लिए निजी स्कूलों का दबाव रहा है। यह फीस वसूलने का षड्यंत्र है।
बिना सुरक्षित परिवहन व्यवस्था के भेजें स्कूल
डीसी कार्यालय पहुंचे सेंट एडवर्ड, चैल्सी, ताराहाल और डीएवी सहित अन्य स्कूलों के अभिभावक विरोचन शर्मा और रुचि जिन्ना ने कहा कि बिना वैक्सीनेशन, बिना सुरक्षित परिवहन सुविधा के वह अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेजेंगे। कहा कि जब पूरा वर्ष ऑनलाइन कक्षाओं के माध्यम से ही बच्चों ने पढ़ाई की तो फिर वार्षिक परीक्षाएं ऑनलाइन करने में क्या दिक्कत है? स्कूल खोलने का फैसला लेने से पहले सरकार और विभाग ने अभिभावकों की राय तक लेना जरूरी नहीं समझा। फैसला थोपने का काम किया है जो अभिभावकों को मंजूर नहीं है। आठवीं कक्षा तक स्कूल खोले जाने का फैसला वापस लिया जाए।
वर्दी के लिए उठाना पड़ रहा हैै अतिरिक्त खर्च
अभिभावकों का कहना है कि दस दिन के लिए खुल रहे स्कूलों में आने वाले बच्चों के लिए वर्दी और पूरा सामान खरीदना पड़ रहा है। इससे अभिभावकों पर आर्थिक बोझ पड़ेगा। कुछ को तो नए सिरे से शहर में किराये पर रूम भी लेने पड़ रहे हैं। अभिभावकों ने कहा कि शहर में कोरोना के मामले जिस तरह से बढ़ रहे हैं, उसे देखते हुए सरकार और स्वास्थ्य विभाग स्कूल खोलने की जगह पहले बच्चों की वैक्सीनेशन को फरवरी तक हर हाल में पूरा करने का प्लान बनाएं। इसके बाद मार्च से नियमित रूप से कक्षाएं शुरू कर दी जाएं।