शिमला। राजधानी शिमला में कोरोना पॉजिटिव आए मरीजों को एक नई परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। संक्रमित होने के बाद मरीजों को दी जाने वाली मेडिसिन किट समय पर घर नहीं पहुंच रही।
मरीज संबंधित वार्ड के डॉक्टर से संपर्क कर रहे हैं लेकिन इसके बावजूद दो दिन बाद दवाइयां मिल रही हैं। इसके चलते कोरोना पॉजिटिव आए मरीज परेशान हो रहे हैं। सबसे अधिक परेशानी उन लोगों को आ रही है जिनके घरों में बच्चे हैं। इन लोगों को दवाइयां मंगवाने के लिए पड़ोसी या फिर अपने रिश्तेदारों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
जिला में कोरोना आजकल मामले बढ़ने लगे हैं। अस्पतालों में टेस्ट करवाने वालों की संख्या भी बढ़ी है। पॉजिटिव आने पर लोगों को घरों में आइसोलेट किया जा रहा है लेकिन मरीजों को दवाइयां तुरंत नहीं मिल रही। दरअसल स्वास्थ्य विभाग ने आशा वर्करों की ड्यूटी वैक्सीनेशन में लगा रखी है। इस वजह से भी यह कार्य प्रभावित हो रही है।
विभाग का दावा है कि जो मरीज लक्षणों को लेकर अस्पतालों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में टेस्ट करवाने के लिए आते हैं उन्हें वहीं से दवाइयां उपलब्ध करवा दी जाती हैं। लेकिन सवाल यह है कि जो मरीज दवाई लेकर नहीं गया है उसके लिए क्या इंतजाम हैं। शहर में आजकल रोजाना 10 से 12 लोग पॉजिटिव आ रहे हैं।
पैरासिटामोल और मल्टीविटामिन
दवाइयां ही दे रहा स्वास्थ्य विभाग
कोरोना पॉजिटिव मरीजों को अब चिकित्सक बुखार आने पर पैरासिटामोल खाने को दे रहे हैं। डॉक्टरों का दावा है कि दिन में तीन बार बड़ों को यह दवाई खिलाई जा सकती है। बुखार आने पर एक दफा और दी जा सकती है। लेकिन कोई भी दवाई खाने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें।
इसके अलावा रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए मल्टीविटामिन दवाइयां दी जा रही हैं। इनमें कैल्शियम बी कांप्लेक्स, विटामिन सी और जिंक शामिल हैं। इसके अलावा स्टीम और गरारे करने को कहा जा रहा है। पूर्व में दी जाने वाली डॉक्सीसाइलीन और अन्य दवाइयां चिकित्सक नहीं दे रहे। विभाग ने मरीजों को इन दवाइयों को देने से मना कर दिया है। इस बीमारी पर कई सारे रिसर्च चल रही हैं इसलिए यह पाबंदी लगाई है।