पुरानी पेंशन बहाली की मांग को लेकर शुक्रवार को हजारों सरकारी कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया। विधानसभा के समीप चौड़ा मैदान में पेंशन अधिकार रैली को संबोधित करते हुए कर्मचारी नेताओं ने मांग पूरी नहीं करने पर केंद्र सरकार को लोकसभा चुनाव में सबक सिखाने की सीधी चेतावनी दी।
कर्मचारियों ने राजनेताओं को पेंशन देने का विरोध करते हुए एक देश एक नीति की मांग उठाई। इधर, दोपहर तीन बजे तक प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री के आने का इंतजार किया।
जब मुख्यमंत्री ऑफिस से कोई सूचना नहीं मिली तो कर्मचारियों ने बारिश के बीच विधानसभा की ओर मार्च शुरू कर दिया। विधानसभा गेट से पहले पुलिस ने बेरिकेट्स लाकर उन्हें रोक दिया। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच धक्कामुक्की भी हुई।
इसके बाद मुख्यमंत्री ने संघ के कुछ सदस्यों को मुलाकात के लिए विधानसभा में बुलाया। इससे पहले नई पेंशन योजना कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष नरेश ठाकुर ने कहा कि सरकार की योजनाओं को जनता तक पहुंचाते हैं और सरकारें हमारे साथ ही खेल खेलने में लगी है।
ठेके पर नियुक्तियां अगर जारी रही तो विभाग नहीं बचेंगे। विभाग नहीं बचे तो सरकारें भी नहीं रहेंगी। संघ के महासचिव भरत शर्मा ने कहा कि पेंशन को लेकर देश में एक नीति होनी चाहिए। राजनेताओं को किस आधार पर पेंशन दी जा रही है।
सरकार को यह भी स्पष्ट करना चाहिए। हरियाणा से आई कर्मचारी नेता प्रोमिला ने भी रैली को संबोधित किया। एनपीएस संघ के जिला सोलन प्रवक्ता देसराज ने कहा कि अगर सरकार पेंशन नहीं दे सकती तो 58 साल की आयु पर सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों को इच्छा मृत्यु का अधिकार दे।
पेंशन अधिकार रैली को एनपीएस कर्मचारी संघ की महिला विंग अध्यक्ष सीमा चौहान, राज्य सचिव ज्योतिका मेहरा, राजकीय अध्यापक संघ के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र चौहान, प्राथमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष जीएस बेदी, देवेंद्र प्रेमी, सुनीता, मनोरमा शर्मा, श्याम लाल गौतम, वनिता सकलानी, शैल चौहान, कपिल, राघव, राजेंद्र, प्रदीप, अरुण धीमान, कमल चौधरी, विनोद डोगरा, राजेंद्र मिन्हास, संजीव गुलेरिया, सुनील तोमर, सुनील जरियाल और राकेश ने भी संबोधित किया।