हिमाचल प्रदेश में कोरोना की संभावित तीसरी लहर को लेकर सरकार ने सीएचसी, सिविल और जोनल अस्पतालों में पीडियाट्रिक्स और गायनी विशेषज्ञ तैनात करने के आदेश दिए हैं। सरकार ने मेडिकल कॉलेजों से बच्चों के अतिरिक्त डॉक्टरों की रिपोर्ट भी मांगी है। साथ ही जो स्टाफ पहले से सीएचसी, सिविल और जोनल अस्पतालों में तैनात है, उसे वहीं रखने के आदेश दिए हैं।
कहा है कि इस स्टाफ की पहले वाले स्थान पर तैनाती नहीं करने के लिए कहा है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि कोरोना महामारी के चलते डॉक्टरों की एडजस्टमेंट नहीं होगी। संभावित तीसरी लहर 18 साल से कम उम्र के लोगों के लिए खतरनाक है। इस आयु वर्ग के लोगों के लिए अभी वैक्सीन नहीं आई है।
विशेषज्ञ डॉक्टरों की मानें तो महामारी तीन वेब में आती है। ऐसे में तीसरी लहर आनी संभावित है। इसके चलते सरकार ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, सिविल और जोनल अस्पताल में गायनी और पीडियाट्रिक्स डॉक्टरों की तैनाती करने का फैसला लिया है। इन अस्पतालों के दोनों विभागों के डॉक्टरों के पद खाली नहीं रहेंगे। गौरतलब है कि प्रदेश में एक-दो सीएचसी को छोड़कर कहीं भी बच्चों के विशेषज्ञ डॉक्टर न होने का मामला पहले भी उठाया गया था।
गर्भवती महिला, और नवजात के लिए कोरोना खतरनाक
गर्भवती महिला और नवजात शिशुओं के लिए कोरोना खतरनाक है। ऐसे में सरकार ने गर्भवती महिलाओं को फ्रंटलाइन में शामिल किया है।
कोरोना संभावित तीसरी लहर को लेकर सरकार ने गायनी और शिशु विशेषज्ञ चिकित्सक की फील्ड में तैनाती के निर्देश दिए हैं। दूसरी लहर के चलते जो स्टाफ फील्ड में तैनात किया गया है, वह वापस नहीं होगा। मुख्यमंत्री की ओर से स्पष्ट निर्देश हैं। - अमिताभ अवस्थी, स्वास्थ्य सचिव प्रदेश सरकार