फ्लावरिंग के दौरान मौसम अनुकूल नहीं रहने के कारण सेब की फसल को तो नुकसान पहुंचा ही, नाशपाती की फसल भी 50 फीसदी घट गई है। उत्पादन में आई कमी से बागवान चिंतित हैं। कई बगीचों में नाशपाती के पौधे खाली दिख रहे हैं। बागवानी के लिए प्रसिद्ध कुल्लू और मनाली में इस साल फलों की पैदावार प्रभावित हुई है। करीब 2,000 मीट्रिक टन नाशपाती का जिले में उत्पादन होता है। इस बार फसल 50 प्रतिशत कम रहने की उम्मीद है।
इसका मुख्य कारण फ्लावरिंग के समय में लगातार बारिश, ओलावृष्टि और अंधड़ माना जा रहा है। इससे नाशपाती के फूल फल बनने से पहले ही गिर गए। बागवानों का कहना है कि बगीचों में फ्लावरिंग और सेटिंग से दौरान मौसम लगातार खराब रहा। इस वजह से नाशपाती को सबसे अधिक नुकसान हुआ है। बागवानी विभाग के उपनिदेशक बीएम चौहान ने बताया कि इस साल नाशपाती की फसल को नुकसान हुआ है। पिछले साल की अपेक्षा इस बार उत्पादन में 50 फीसदी की कमी आने की आशंका है।
जुलाई में तैयार होगी फसल
नाशपाती की फसल जुलाई के दूसरे पखवाड़े तक मंडियों में पहुंचना शुरू हो जाएगी। सेब की फसल से पहले मंडियों में नाशपाती पहुंचेगी। उत्पादन कम होने से इस साल बागवानों को नाशपाती के अच्छे दाम मिलने की उम्मीद है। बागवान नकुल खुल्लर, मोहर सिंह और राम प्रकाश का कहना है कि नाशपाती पर मौसम की मार पड़ी है। फ्लावरिंग के समय लगातार बारिश हुई। इससे फसल को नुकसान हुआ है।