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नोटबंदी: बंसल ने मोदी पर कसा तंज, कहा-इस मर्ज की दवा बस रोते रहना है

Wed, 07 Dec 2016 08:37 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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पूर्व रेल मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन कुमार बंसल ने कहा है कि केंद्र सरकार के नोटबंदी के फैसले से पूरे देश भर के लोगों को नोटगुनिया हो गया है। नोटबंदी से हिमाचल के लोगों को हो रही असुविधा पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केंद्र सरकार पर तीखे निशाने साधे।
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उन्होंने व्यंग्य किया कि इस मर्ज की दवा बस रोते रहना ही है। इसी से ये रोग ठीक होगा। उन्होंने कहा कि इस फैसले से जीडीपी को करीब डेढ़ लाख करोड़ रुपये का नुकसान होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूरे देश की जनता पर सर्जिकल स्ट्राइक किया है।

पवन कुमार बंसल मंगलवार को राजीव भवन शिमला में पत्रकार वार्ता कर रहे थे। पवन कुमार बंसल ने कहा कि  चिकनगुनिया बीमारी अब खत्म हो चुकी है और सर्दियों में लोगों को ये नोटगुनिया रोग लग गया है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने इस फैसले को बगैर तैयारियों के ही किया है।
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इस फैसले को लेने से पहले विपक्षी दल कांग्रेस को भी विश्वास में लिया जाता तो ये गलत न होता। इस बारे में बेशक मोदी सरकार किसी तरह की खुशफहमी में रहे, मगर आम जनता परेशान है।
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हैरानी की बात कि अमीरों के पास नहीं मिले पुराने नोट

उन्होंने कहा कि ये बड़ी चौंकाने वाली बात है कि धनाढ्य लोगों के पास 500 और 1000 रुपये के नोट नहीं मिले। ये आम आदमी के पास ही टिफिन बॉक्स में नजर आए। उन्होंने कहा कि जितने नोट भारत के लोगों को चाहिए, उन्हें छापने वाली मशीनें भी नाकाफी हैं।

केवल पांच फीसदी लोगों के पास ही क्रेडिट कार्ड या डेबिट कार्ड नहीं हैं। 95 फीसदी लोग अभी इससे वंचित है। कैश टू जीडीपी हमेशा 12 फीसदी ही रहता है। मगर भारत सरकार ने ये फैसला लेने से पहले ये नहीं बताया कि ये पांच फीसदी रह जाएगा।

उनका कहना है कि 500 रुपए और 1000 रुपए के नोट बंद करके केंद्र सरकार ने देश की जनता को लाइन में खड़ा कर दिया है। आज पूरा देश इस फैसले से परेशान है। इस निर्णय के बाद देश में भ्रष्टाचार बढ़ेगा और देश को भयंकर आर्थिक नुकसान होगा।

उन्होंने कहा कि नोटबंदी पर शुरू से लेकर अब तक ढेरों अधिसूचनाएं आ चुकी हैं। देश में मात्र 14 लाख स्वाइप मशीनें हैं, जबकि आज जरूरत 2 करोड़ मशीनों की है। ऐसे में कैश लैस सोसायटी की बात गले नहीं उतरती है। आज तक देश में लाइनों में लग कर 80 लोगों को मौत हो चुकी है।
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