बाद में वरिष्ठ चिकित्सक के हस्तक्षेप से मिली राहत अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। आईजीएमसी के नेत्र रोग विभाग में मंगलवार को चश्मों के नंबर रिफ्लेक्शन टेस्ट करवाने आए मरीज और उनके तीमारदार दोपहर डेढ़ बजे तक टेस्ट न होने पर भड़क गए। मरीजों और परिजनों का आरोप था कि विभाग के 1117 बी नंबर कमरे में उनके चश्मे का नंबर (रिफलेक्शन) टेस्ट होना था।
मरीज सुबह दस बजे से लाइन खड़े थे लेकिन अचानक बारह बजे तकनीशियन बिना बताए कमरा छोड़कर निकल गया और उनके दोपहर डेढ़ बजे तक टेस्ट नहीं हो पाए। गुस्साए मरीजों और उनके परिजनों ने विभाग के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. प्रवीण पंवर के समक्ष यह समस्या उठाई। इसके बाद सभी आए मरीजों के टेस्ट हो गए।
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नरेश दत्त शर्मा निवासी खटनोल और नीमा देवी शर्मा ने बताया कि वह सुबह दस बजे से लाइन में खड़े थे, बारह बजे तक टेस्ट होते रहे लेकिन इसके बाद अचानक तकनीशियन कमरा छोड़कर बिना बताए चला गया, अब उनका टेस्ट नहीं हो रहा है। दो बजे तक उनका टेस्ट नहीं हुआ था। नालागढ़ से आई मरीज प्यारी ने बताया कि पता नहीं अब उनका टेस्ट होगा या नहीं। एक अन्य बुजुर्ग महिला प्रितम देवी के साथ आए उनके बेटे बहादुर सिंह कंवर निवासी ठियाेग ने बताया कि वह सुबह से भूखे प्यासे यहां इंतजार कर रहे हैं। दो बजने को आए हैं उनका टेस्ट तक नहीं हुआ। तकनीशियन बारह बजे कमरा बंद करके चला गया है। लंबा इंतजार करने के बाद इन मरीजों और परिजनों ने विभाग के वरिष्ठ चिकित्सक से मामला उठाया और टेस्ट करवाने को कहा, तब उनका दोपहर बाद टेस्ट हो सका।
सभी मरीजों के बाद में करवाए दिए थे टेस्ट : डॉ. प्रवीण
डॉ. प्रवीण पंवर ने कहा कि बारह बजे तक चश्मे के नंबर का टेस्ट करने को रूम नंबर 1117 बी में तकनीशियन बैठता है। इसके बाद बारह बजे उसे अन्य कमरे में ओसीटी टेस्ट करने होते हैं। वहां भी मरीज इंतजार कर रहे थे। चश्मे के नंबर का टेस्ट करवाने आए मरीजों को लगा कि तकनीशियन बिना बताए चला गया है, अब उनका टेस्ट नहीं होगा। मरीजों की बात सुनने के बाद दोपहर बाद सभी के टेस्ट करवा दिए गए थे।