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मरीज की किडनी निकालने के मामले में एक और खुलासा

Fri, 30 Sep 2016 10:43 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, जाहू (हमीरपुर)
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डॉ. राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज
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डॉ. राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल टांडा में इलाज के नाम पर बिना बताए किडनी निकालने के मामले में सर्जरी विभाग के डॉक्टर फंस गए हैं। प्रारंभिक जांच में स्पष्ट हो गया है कि ऑपरेशन करने वाले डॉक्टरों की टीम ने कई औपचारिकताएं पूरी नहीं कीं।
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स्वास्थ्य विभाग की ओर से ऑपरेशन से पहले भरवाए जाने वाले फॉर्म पर न मरीज और न ही परिजनों के हस्ताक्षर हैं। ऑपरेशन से पूर्व मरीज के परिजनों के एक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर लिए जाते हैं और संबंधित को बीमारी के बारे में बताया जाता है।

मामले की शिकायत पीड़ित जयपाल ने टीएमसी प्रशासन से की है। इसके बाद टीएमसी की अतिरिक्त निदेशक मधु चौधरी ने सर्जरी विभाग के एचओडी को तीन दिन में जांच रिपोर्ट देने के निर्देश दिए। अतिरिक्त निदेशक ने गत दिवस मामले में पीड़ित पक्ष को टीएमसी बुलाकर उससे पूछताछ की है।
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उधर, सर्जरी विभाग के एचओडी डॉ. रमेश भारती ने कहा कि जाहू निवासी जयपाल के ऑपरेशन से संबंधित जांच को अस्पताल प्रशासन का पत्र मिल गया है। कहा कि जांच रिपोर्ट तीन दिन में अस्पताल प्रशासन को सौंप दी जाएगी। उन्होंने माना कि ऑपरेशन से पूर्व फॉर्म पर मरीज और परिजनों के हस्ताक्षर नहीं हैं, जबकि ये औपचारिकताएं पूरी करवानी होती हैं।

यह है सारा मामला
16 दिसंबर, 2014 को रेशे वाली बीमारी के उपचार के लिए जयपाल टीएमसी में दाखिल हुए। सारे टेस्ट करवाने के बाद 29 दिसंबर, 2014 को ट्यूमर का तर्क देकर डॉक्टरों की तीन सदस्यीय टीम ने ऑपरेशन किया। इस दौरान दाईं साइड की किडनी को निकाल दिया गया। उसके बाद डॉक्टरों ने बताया कि अब रेशे वाली बीमारी से छुटकारा मिल गया।

जयपाल ने बताया कि अप्रैल 2013 से आज तक रेशे वाली बीमारी से पीड़ित है। इसके बाद एक प्राइवेट क्लीनिक में अल्ट्रासाउंड करवाया तो डॉक्टर ने बताया कि आपकी दाईं साइड की किडनी निकाल दी गई। आरोप लगाया कि डॉक्टरों ने ऑपरेशन के दौरान किडनी निकालने की बात को छुपाया है। जयपाल का वर्तमान में इलाज पीजीआई चंडीगढ में चल रहा है।
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