प्रदेश सरकार रिटायर होने वाले अपने खास अधिकारियों कर्मचारियों पर मेहरबानी का मोह छोड़ नहीं पा रही। रिटायर होने के बाद या तो उन्हें एक्सटेंशन दिया जा रहा है या फिर कहीं न कहीं एडजस्ट कर उन्हें उपकृत किया जा रहा है। इससे नए या वरिष्ठ अफसरों को अपनी योग्यता दिखाने का मौका नहीं मिल पा रहा जिसके चलते नौकरशाही में जबरदस्त गुस्सा है।
ताजा मामला राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का सामने आया है। 30 सितंबर को बोर्ड के प्रधान वरिष्ठ पर्यावरण अधिकारी पद से रिटायर हो रहे डीके शर्मा को सेवा विस्तार देने की कवायद शुरू हो गई है। पर्यावरण सचिव को फाइल भी संस्तुति के लिए भेज दी गई है। सेवा विस्तार के लिए दलील दी गई है कि बोर्ड में कुछ ऐसे अहम कार्य हैं जो यही कर सकते हैं लिहाजा इन्हें दोबारा से नौकरी दी जाए।
सूत्रों का कहना है कि सत्ता और रुसूख के चलते शासन ने भी इन्हें एक्सटेंशन देने की तैयारी कर ली है। हालांकि इसके लिए अब मुख्यमंत्री दफ्तर को भरोसे में नहीं लिया गया है। खास बात यह है कि राज्य की नौकरशाही राजनीति पर हावी है और उनपर राजनीतिक नियंत्रण छूटता जा रहा है।
एक्सटेंशन या पुनर्नियुक्ति के लिए नौकरशाही के पास कोई तार्किक आधार नहीं है। अधिकााियों की योग्यता के नाम पर उन्हें ये तोहफे दिए जा रहे हैं। ऐसा तब हो रहा है जब राज्य भारी आर्थिक संकट में है। हालांकि नई सरकारी भर्तियों को जरूर पांच साल के लिए अनुबंध पर रखा जा रहा है।
विरोध के बाद भी मिल रहा एक्सटेंशन
पिछले चार साल के दौरान कई ऐसे कर्मचारी अधिकारी है जिन्हें सेवा विस्तार या दोबारा नियुक्ति दी गई। सेवा विस्तार एवं पुनर्नियुक्ति को लेकर भाजपा से लेकर कर्मचारियों तक ने खुलेआम विरोध किया और मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह से आपत्ति जताई।
लेकिन इसके बाद भी न तो किसी पर कोई असर पड़ा और न ही इस प्रक्रिया को बंद किया गया। हाल में पीए पीएस संघ ने इसका विरोध करते हुए सरकार के इस कदम को युवाओं के साथ धोखा बताया। कहा कि रिटायर होने के बाद अगर ये कर्मचारी कुछ गलत करें तो गलती इनकी नहीं होगी। ऐसे में विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो सकते हैं।
इन्हें मिल चुका है सेवा विस्तार
मुख्य सचिव पद से रिटायर हुए पी मित्रा को रिटायरमेंट के बाद राज्य चुनाव आयोग में अहम जिम्मेदारी दे दी गई। विशेष सचिव मुख्यमंत्री राकेश शर्मा को दो बार सेवा विस्तार मिल गया है। इसी तरह फिशरीज निदेशक गुरूचरण सिंह की 30 अगस्त 2016 को सेवा निवृत्ति थी लेकिन उन्हें एक साल का सेवा विस्तार मिला है।
वहीं, संयुक्त सचिव गृह के पद पर तैनात देवेंद्र कुमार सरस्वती 31 अक्तूबर 2013 और उप सचिव विधि धर्म सिंह परिहार को 30 जून 2013 से अब तक सेवा विस्तार मिल रहा है। नलिन महाजन, कौल सिंह के निजी सचिव अरुण कुमार, अवर सचिव मुख्यमंत्री प्रमोद सिंह, स्पेशल प्राइवेट सेक्रेट्री ओंकार सिंह ठाकुर भी इसी सूची में शामिल हैं।
क्या कहते हैं जिम्मेदार
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने इस मामले में कुछ भी कहने से इंकार कर दिया। वहीं, मुख्य सचिव वीसी फारका ने कहा कि किसी भी अधिकारी कर्मचारी को उसकी योग्यता और सरकार की जरूरत के आधार पर ही एक्सटेंशन दिया जाता है। कहा कि विकल्प मिलने तक ही एक्सटेंशन दिया जाता है।