राजधानी के उपनगर न्यू शिमला में लोग मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। यहां हर सेक्टर की अपनी सोसायटी है। लगातार बढ़ती आबादी के साथ समस्याएं भी बढ़ रही हैं। सेक्टर-एक में पार्किंग सबसे बड़ी परेशानी है। नगर निगम और हिमुडा की ओर से यहां कोई बड़ी पार्किंग उपलब्ध नहीं करवाई गई है। कॉलोनियों की सड़कों पर वाहनों की कतारें लगी रहती हैं। पेश है रिपोर्ट...
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। शहर के पटयोग वार्ड में शामिल सेक्टर-एक में रहने वाले सैकड़ों परिवार आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। सेल्फ फाइनेंस्ड स्कीम के तहत बसाए इस क्षेत्र में पार्किंग सबसे बड़ा मुद्दा बन गई है।
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शाम होते ही कॉलोनियों में सड़क किनारे वाहन खड़े करने के लिए मारामारी शुरू हो जाती है। हिमुडा ने न्यू शिमला में ज्यादातर कॉलोनियां बसाई हैं। बाद में इन्हें नगर निगम को सौंप दिया लेकिन अब पार्किंग की सुविधा न तो नगर निगम उपलब्ध करवा रहा है और न ही हिमुडा। कॉलोनियों को जोड़ने के लिए बनाई संपर्क सड़कों पर अब वाहनों की कतारें लगी रहती हैं। सेक्टर एक में जिन लोगों ने फ्लैट खरीदे हैं, उन्हें भी पार्किंग की सुविधा नहीं मिल रही है। अवैध पार्किंग के कारण आए दिन जाम लगता है। सोसायटी की समस्याओं को उठाने के लिए रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (आरडब्ल्यूए) बनाई गई है। इसके अलावा यहां नगर निगम के पार्षद भी हैं। सड़कों पर गति सीमा दर्शाने वाले साइन बोर्ड नहीं हैं। इस वजह से तेज रफ्तार से चलने वाले वाहनों के कारण हादसों का खतरा बना रहता है।
सेक्टर एक की पांच भी बड़ी समस्याएं कई भवनों तक सड़क सुविधा नहीं लटकते बिजली तार से हादसों का खतरा लावारिस कुत्तों का आतंक सरकारी टैक्सी की सुविधा तक नहीं पेयजल आपूर्ति की टाइमिंग नहीं
आंकड़ों में जानें सोसायटी 2011 में पंजीकृत हुई थी यह सोसायटी करीब 10 हजार है क्षेत्र की आबादी करीब 690 फ्लैट और मकान हैं
आबादी बढ़ी, सुविधाएं शून्य शहर में जहां तीसरे दिन पानी मिलता है, वहीं यहां के लोगों को चौथे दिन पानी मिलता है। पूछताछ करने पर बताया जाता है कि वोल्टेज कम होने के कारण दिक्कतें आ रही हैं। लोगों की मांग है कि उनकी समस्याओं का जल्द समाधान किया जाए।
-विक्रम सिंह सेन, वरिष्ठ उपाध्यक्ष, सेक्टर-1 आरडब्ल्यूए
पेड़ों की लॉपिंग की जाए पेड़ों की टहनियों ने स्ट्रीट लाइटों को पूरी तरह ढक लिया है। इस वजह से अंधेरा बना रहता है और पैदल चलने वाले लोगों के गिरकर चोटिल होने का खतरा रहता है। निगम से मांग है कि इस समस्या का समाधान किया जाए।
-सुमन पाल दत्ता, महासचिव, सेक्टर-1 आरडब्ल्यूए।
बुजुर्ग पर लावारिस कुत्तों ने किया हमला लावारिस कुत्ते इस इलाके में रहने वाले लोगों के लिए मुसीबत बन गए हैं। कुछ दिन पहले एक बुजुर्ग को लावारिस कुत्तों ने काट लिया। इस मामले में नगर निगम ने भी संज्ञान नहीं लिया। निगम को चाहिए कि आक्रामक कुत्तों की समस्या का समाधान करे और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करे।
-सोहन फोतेदार
चंडीगढ़ की तर्ज पर जगह-जगह लगें साइन बोर्ड कहने को तो यह पॉश इलाका है, लेकिन यहां चंडीगढ़ की तर्ज पर साइन बोर्ड तक नहीं लगाए गए हैं। इस वजह से रास्ता भटकने वाले लोगों को परेशानी होती है। नगर निगम के साथ-साथ हाउसिंग बोर्ड को भी इस ओर ध्यान देना चाहिए।
— चंद्र मोहन वालिया।
शुरू की जाए टैक्सी सेवा वरिष्ठ नागरिकों के लिए यहां से टैक्सी सेवा उपलब्ध करवाई जानी चाहिए। इस संबंध में कई साल से एचआरटीसी को ज्ञापन भी सौंपे जा चुके हैं, लेकिन विभाग ने अब तक इस ओर ध्यान नहीं दिया है।
-डॉ. अशोक शर्मा निवासी सेक्टर एक
तारों के जंजाल से चलना हुआ मुश्किल सेक्टर-एक तारों के जंजाल से भरा पड़ा है। जियो और एयरटेल की तारें खंभों पर लटक रही हैं, जबकि सड़कों के किनारे केबल के तारों के बंडल पड़े हुए हैं। इससे दोपहिया वाहन चालकों को परेशानी होती है। कुछ लोग इन तारों के कारण गिरकर चोटिल भी हो चुके हैं, लेकिन इन्हें हटाया तक नहीं गया है।
-रमेश कपूर निवासी सेक्टर एक
जहां जगह, वहां बनाई गई पार्किंग लोगों की सुविधा का खास ख्याल रखा गया है। लोगों ने पार्किंग के लिए जिन जगहों की मांग की थी, वहां उपलब्ध स्थान के अनुसार इसकी व्यवस्था की गई है। लोगों को किसी तरह की परेशानी न हो, इसका ध्यान रखा गया है।
-आशा शर्मा, पार्षद, पटयोग वार्ड
आपातकालीन स्थिति में बाहर निकलने का रास्ता नहीं न्यू शिमला में आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के लिए कोई योजना नहीं बनाई गई है। यहां आगजनी जैसी घटना होने पर बाहर निकलने के लिए पर्याप्त रास्ते नहीं हैं। प्रवेश और निकास के लिए एक ही बिंदु है। हिमुडा की ओर से बनाई गई कॉलोनियों में भी पर्याप्त पार्किंग की व्यवस्था नहीं है। इसके अलावा, बाहरी लोगों की सुविधा के लिए भी कोई काम नहीं किया गया है। बिजली की तारें अब भी पेड़ों पर लटकी हुई हैं।
मरम्मत का कार्य स्थानीय निकाय के पास
हिमुडा की ओर से बनाए गए फ्लैट अब स्थानीय निकाय के अधीन हैं। चूंकि स्थानीय निकाय इनसे संबंधित कर वसूलता है, इसलिए मरम्मत और अन्य कार्यों की जिम्मेदारी भी उसी की है।