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शहर में गाड़ियां पार्क करना हुआ महंगा

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शिमला। यदि आप शिमला शहर में रह रहे हैं और आपके पास गाड़ी है तो अब आपको अपने कमरे के किराये से ज्यादा गाड़ी की पार्किंग फीस चुकानी होगी। शहर में मासिक पार्किंग फीस 1500 रुपये तक बढ़ गई है।
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शहर में पीपीपी मोड पर बनाई पार्किंग के संचालकों ने छोटे वाहनों की मासिक पार्किंग फीस ढाई हजार से बढ़ाकर चार हजार रुपये कर दी है। सर्कुलर रोड पर लिफ्ट के पास बनी शहर की सबसे बड़ी पार्किंग में यह फीस वसूली शुरू हो गई है। छोटा शिमला पार्किंग में भी शुल्क बढ़ाने के फरमान जारी हो गए हैं। शहर में एक ओर पुलिस अवैध पार्किंग करने वालों के धड़ाधड़ चालान काट रही है तो दूसरी ओर पार्किंग के अंदर गाड़ियां खड़ी कर रहे लोगों के लिए मुसीबत खड़ी हो गई है। सबसे ज्यादा परेशान कारोबारी और स्थानीय लोग हैं जो इन पार्किंग में गाड़ियां खड़ी करते हैं। संचालकों के ताजा फरमानों के बाद कई कारोबारियों ने जहां शुल्क देना शुरू कर दिया है, वहीं कई ऐसे हैं जिन्होंने अब पार्किंग से गाड़ियां बाहर निकाल ली हैं। शहर में अब किराए के कमरे सस्ते हैं जबकि गाड़ी पार्क करना महंगा हो गया है। कई वाहन मालिकों को लोन की किश्त से ज्यादा अब पार्किंग की फीस चुकानी होगी।
अगस्त से बढ़ाया शुल्क, निगम मौन
नगर निगम ने कोर एरिया की पार्किंग में पूरा महीना गाड़ियां पार्क करने के एवज में दो हजार रुपये शुल्क तय किया है। जीएसटी समेत यह शुल्क 2360 रुपये बनता है। लेकिन ज्यादातर संचालक 2360 की बजाय अभी तक 2500 रुपये मासिक वसूल रहे थे। अब अगस्त से शुल्क 4000 रुपये कर दिया गया। इसके बारे में कई कारोबारियों ने नगर निगम में शिकायत दी, लेकिन प्रशासन ने कुछ नहीं किया। मोटरसाइकिल पार्किंग का भी छोटी गाड़ी के बराबर शुल्क लिया जा रहा है। उधर, पार्किंग संचालक दावा कर रहे हैं कि उन पर पूरा महीना गाड़ियां पार्क करने या मासिक शुल्क लेने का नियम लागू नहीं होता। पूरे महीने की फीस प्रतिदिन शुल्क के हिसाब से 5310 रुपये बनती है। लेकिन अभी तक लोगों से 2500 ही लिए जा रहे थे। बढ़ते घाटे को कम करने के लिए अब शुल्क बढ़ाया गया है।
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संचालक बोले-हम दे रहे डिस्काउंट
लिफ्ट और छोटा शिमला स्थित मल्टी स्टोरी पार्किंग के संचालक गौरव सूद ने कहा कि उन पर मासिक पार्किंग या मासिक शुल्क लेने का नियम लागू नहीं होता। कहा कि वह पहले ही कम रेट पर मासिक पार्किंग की सुविधा दे रहे थे। घाटा पूरा करने के लिए अब रेट बढ़ाना मजबूरी है लेकिन, नए रेट भी प्रतिदिन के हिसाब से बनने वाले शुल्क से काफी कम हैं। कहा कि निगम ने भी मासिक शुल्क को लेकर कोई निर्देश नहीं दिया है। हम नियमों के मुताबिक ही शुल्क ले रहे हैं।
क्या कहते हैं आयुक्त
पार्किंग संचालकों के शुल्क बढ़ाने की शिकायतें मिली हैं जिन पर कार्रवाई की जा रही है। जिन संचालकों पर मासिक पार्किंग शुल्क की शर्त लागू नहीं हो रही, वे एकसाथ चार हजार की रसीद भी नहीं काट सकते। इन्हें घंटों के हिसाब से शुल्क लेना होगा। जल्द ही इस बारे में बैठक कर चर्चा भी करेंगे।
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पंकज राय, नगर निगम आयुक्त
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