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Shimla News: पार्किंग सुविधा 7 हजार, गाड़ियां 70 हजार, सड़क किनारे लगी रही कतार

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पार्किंग का पचड़ा-1
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राजधानी शिमला में पार्किंग के लिए लोगों में मारामारी हो रही है। शहर में दौड़ रही 80 फीसदी गाड़ियों के लिए पार्किंग सुविधा नहीं है। शहरवासियों के साथ सैलानियों को भी अब मजबूरन सड़क किनारे गाड़ियां खड़ी करनी पड़ रही हैं। हालत यह है कि शहर के ज्यादातर एनएच समेत अन्य संपर्क सड़कों पर अब दोनों ओर गाड़ियां पार्क की जा रही हैं। इससे रोज जाम भी लग रहा है। पेश है रिपोर्ट:-
शहर में 40 हजार से ज्यादा हैं पंजीकृत वाहन
30 हजार से ज्यादा दूसरे जिलों की गाड़ियां
वीकेंड पर आते हैं पर्यटकों के दो हजार वाहन

शहर में छोटी और बड़ी 150 पार्किंग हैं उपलब्ध
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। स्मार्ट सिटी शिमला में पार्किंग अब सबसे बड़ी परेशानी बन गई है। स्कूल-सरकारी दफ्तर हो या फिर अस्पताल, हर जगह पार्किंग के लिए मारामारी है।
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पार्किंग न होने से लोग सड़कों पर गाड़ी खड़ी करने को मजबूर हैं। हालत यह है कि शहर में 80 फीसदी से ज्यादा वाहन अब सड़कों के किनारे खड़े हो रहे हैं। शिमला आने वाले सैलानी भी अब यहां पार्किंग के लिए भटकते हैं। आंकड़ों पर नजर डालें तो शिमला शहर में पंजीकृत वाहनों की संख्या 40 हजार से ज्यादा है। यहां दूसरे जिलों की भी 30 हजार से ज्यादा गाड़ियां रोज आवाजाही करती हैं। वहीं टूरिस्ट सीजन में दूसरे राज्यों से भी दो से पांच हजार तक पर्यटक वाहन शिमला पहुंचते हैं। शहर में सिर्फ सात हजार वाहनों की पार्किंग सुविधा है। बाकी वाहन सड़कों पर खड़े हो रहे हैं।
शहर में पार्किंग का संचालन नगर निगम के जिम्मे हैं। निगम की शहर में छोटी-बड़ी करीब 150 पार्किंग हैं जिनमें सात हजार वाहन पार्क हो सकते हैं। येलो लाइन में 1342 वाहनों के लिए पार्किंग सुविधा है। बाकी वाहनों के लिए पार्किंग सुविधा नहीं है। मजबूरन लोग एनएच से लेकर वार्डाें की एंबुलेंस सड़कों पर गाड़ियां खड़ी करने को मजबूर हैं। इससे आए दिन यातायात जाम भी लग रहा है।




निगम के पास न प्लानिंग न ही बजट
शहर में पार्किंग निर्माण के लिए काफी जमीन उपलब्ध है। अकेले निगम के पास पास 6200 बीघा से ज्यादा की जमीन है। शहर में नालों के ऊपर भी पार्किंग बन सकती हैं। रोड साइड स्टील पार्किंग का भी विकल्प है। बाकायदा पार्षदों ने पार्किंग निर्माण के लिए कई साल से प्रस्ताव भेज रखे हैं लेकिन इन पर काम नहीं हो रहा। नगर निगम के पास न सिर्फ प्लानिंग की कमी है बल्कि बजट भी नहीं है। दो साल पहले ही में निगम ने 20 से ज्यादा स्टील पार्किंग के लिए सरकार से पैसा मांगा था लेकिन आज तक बजट नहीं मिला।
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स्मार्ट सिटी से पैसा मिला पर लटका दिया काम
स्मार्ट सिटी मिशन के तहत शहर में पार्किंग बनाने के लिए करोड़ों रुपया मिला था। इससे करीब दो हजार वाहनों के लिए छह से ज्यादा पार्किंग बनाने का काम भी शुरू हुआ लेकिन इसका काम इतना सुस्त है कि जो पार्किंग 2023 में बननी थी, वह दिसंबर 2025 में भी अधूरी है। आईजीएमसी न्यू ओपीडी, डेंटल कॉलेज, ऑकलैंड, विकासनगर, एसडीएम, लोकल बसस्टैंड पार्किंग अभी तक अधूरी हैं।


नई पार्किंग की बना रहे हैं योजनाएं : जनारथा
-स्मार्ट सिटी मिशन के तहत शहर के अस्पतालों के आसपास नई पार्किंग बन रही है। अब सर्कुलर रोड पर भी हमने कई स्थान ऐसे चिह्नित किए हैं जहां पार्किंग बन सकती हैं। लक्कड़ बाजार बस स्टैंड, स्नो व्यू लॉज के पास नई पार्किंग बनाने की योजना है। केंद्र से भी बजट की मांग की है। पार्षदों से प्रस्ताव मिलने पर स्टील पार्किंग के लिए विधायक निधि से भी बजट दे रहे हैं।
हरीश जनारथा, शहरी विधायक
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