सरहदों की रक्षा के लिए अपनी जवानी बिताने वाले अर्द्धसैनिक बल के जवानों और परिजनों को तेल, साबुन के लिए भी लड़ाई लड़नी पड़ रही है। सीएसडी कैंटीनों में अभी तक सिफारिश पर ही इन्हें सामान मिलता है। इस वर्ग को यह मालूम नहीं होता है कि कब उन्हें कैंटीन में सामान मिलेगा।
शिमला जाएं तो यहां पर राज्य कल्याण अधिकारी के बोल होते हैं कि हम हैं तो तेल साबुन मिल रहा है, आने वाले शायद देगा या नहीं। जिलास्तर पर भी यही हाल है। इस वर्ग के लिए पॉलिसी न बनने से अकसर सीएसडी कैंटीन में यही ताने सुनते हैं। अर्द्धसैनिक वेलफेयर एसोसिएशन के राज्य स्तरीय सम्मेलन में मंडी के बाबा भूतनाथ मंदिर के हॉल में पेंशनरों और उनके परिजनों ने अपना दर्द कुछ इस तरह बयां किया।
सम्मेलन में खूब नारे लगे। संगठन को दो धड़ों से एक करने की खूब संकल्प हुए। सरकार को जगाना है, अपना हक पाना है। भीख नहीं यह हमारा हक है। लेकिन, हर सूरत में पैरामिलिट्री फोर्स की मांगें पूरी करवानी है। सम्मेलन में जिला अध्यक्षों और राज्य कार्यकारिणी के पदाधिकारियों ने अपने विचार रखे।
प्रदेश अध्यक्ष सेवानिवृत्त डीआईजी आरके शर्मा ने सम्मेलन की अध्यक्षता की। सम्मलेन में कई जिलों से पदाधिकारी पहुंचे। सम्मेलन में प्रदेश महासचिव एमपी शर्मा, सचिव मनवीर चंद कटोच, प्रदेश वरिष्ठ सलाहकार एमएल ठाकुर, संयोजक बीएस सकलानी, पालमपुर इकाई अध्यक्ष विक्रम मेहता, त्रिलोक सिंह हमीरपुर जिलाध्यक्ष, धर्म दत्त, सत्या प्रकाश सहित अन्य उपस्थित रहे।