कारगिल विजय दिवस के अवसर पर झंडूता में विधायक जीत राम कटवाल की अध्यक्षता में शौर्य दिवस मनाया गया। इस अवसर पर विशेष अतिथि के रुप में उपस्थित परमवीर चक्र विजेता सूबेदार संजय कुमार को सम्मानित किया गया। इसके अतिरिक्त शहीद हवलदार देशराज, प्यार सिंह भभौरिया, राकेश ठाकुर और अश्वनी कुमार चंदेल के परिवारों को सम्मानित किया गया।
संजय कुमार ने कहा कि अमर उजाला से हुई बातचीत में परमवीर चक्र विजेता संजय कुमार ने कहा कि उन्हें गर्व है कि वो भारत माता के सपूत हैं। अगर गलवां घाटी को लेकर चीन के साथ भारत को युद्ध करना पड़ा और सरकार ने दिशा निर्देश जारी किए तो वो गलवां में भारतीय सेना का नेतृत्व करने को तैयार हैं। कारगिल युद्ध में शहीदों ने जो बलिदान देश के लिए दिया है। वह स्मरणीय है। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन विजय के दौरान 11 जवानों के साथ मुझे भी शामिल किया गया।
विजय हासिल करने के लिए उन्होंने दुश्मनों के हथियारों से ही दुश्मनों को मार गिराया था। कश्मीर सीमा पर कारगिल क्षेत्र में मशकोह घाटी में पाकिस्तान के कब्जे से दो चैकियां खाली करवाने का निर्णायक ऑपरेशन शुरू होने से पहले 13 जैक राइफल्स के कैप्टन विक्रम बतरा ने द्रास सेक्टर में प्वाइंट 5140 को जीत लिया था।
यह हिंदुस्तान की विजय का एक बड़ा पड़ाव था। 14 जून से 20 जून 1999 के बीच में हुए इस ऑपरेशन में कैप्टन बतरा के दिल मांगे मोर के नारे ने हजारों सैनिकों का जोश कई गुना बढ़ा दिया था। प्वाइंट 4875 और फ्लैट टॉप इन दोनों चौकियों को शत्रु से मुक्त कराने का 17 जाट रेजीमेंट का एक प्रयास असफल रहा था।