पैराग्लाइडिंग एंडवास (एसआईवी) कोर्स में भाग ले रहे पायलटों ने रविवार को बिलासपुर की बंदलाधार से उड़ान भर गोबिंद सागर झील के किनारे लैंडिंग की। पायलटों को झील के ऊपर हवा में आपात स्थिति से निपटने का प्रशिक्षण दिया गया। सोमवार को पहले बैच के प्रशिक्षु प्रशिक्षण की अंतिम उड़ान भरेंगे और गोबिंद सागर झील के बीच लैंड होगी। विश्व की तीन बड़ी एक्रो पैराग्लाइडिंग साइट में शुमार बंदला धार पर पैराग्लाइडिंग एडवांस (एसआईवी) कोर्स करवाया जा रहा है। पहले बैच में महाराष्ट्र, हिमाचल, हरियाणा के 25 प्रशिक्षु पायलट भाग ले रहे हैं।
रविवार को प्रशिक्षुओं को हवा में तेज गति के साथ दाएं बाएं घूमना, गति को नियंत्रित करना और इसके बाद आराम से लैंडिंग करने का प्रशिक्षण दिया गया। बंदलाधार से उड़ान के बाद वॉकी टॉकी के माध्यम से प्रशिक्षक प्रशिक्षुओं को दिशा-निर्देश देते रहे। सोमवार को पहले बैच का प्रशिक्षण समाप्त हो जाएगा। इस दौरान प्रशिक्षुओं को रिजर्व पैराशूट के माध्यम से झील के बीच उतरने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके लिए झील के बीच विशेष रूप से दो रेस्क्यू टीम तैनात की गई हैं। जो दो मोटर वोट में सवार होकर प्रशिक्षण के दौरान हर समय झील के बीच रहती हैं। जैसे ही पायलट झील में कूदता है, वैसे ही टीम उसे रेस्क्यू कर बाहर लाती है। यह प्रशिक्षण का सबसे महत्वपूर्ण भाग है। सोमवार से ही दूसरे बैच का प्रशिक्षण भी शुरू हो जाएगा। दूसरे बैच में भी 25 प्रशिक्षु ही भाग लेंगे।