पैराग्लाइडिंग के लिए मशहूर बिलिंग घाटी इस बार किसी बड़ी प्रतियोगिता से महरूम रह सकती है। पैराग्लाइडिंग के लिए दुनिया भर में दूसरे स्थान पर आने वाली बीड़ बिलिंग घाटी की सरकारी तौर पर अनदेखी इसका कारण माना जा रहा है। पिछले साल बिलिंग में तीनों भारतीय सेनाओं के पायलटों के मध्य पहली पैराग्लाइडिंग प्रतियोगिता हुई थी। स्थानीय प्रशासन ने पर्यटन विभाग के सहयोग से प्रतियोगिता का सफल आयोजन करवाया था।
उससे पूर्व कांग्रेस कार्यकाल में पहले वर्ल्ड कप के साथ प्री-वर्ल्ड कप घाटी में आयोजित हुआ था। इस बार बिलिंग को सरकारी अनदेखी का शिकार होना पड़ा है। अब लग रहा है कि इस वर्ष घाटी में किसी भी प्रकार की प्रतियोगिता का आयोजन संभव नहीं हो सकेगा। अक्तूबर और नवंबर के उत्तरार्द्ध के समय में विदेशी पायलटों से घाटी भरी रहती है। वर्तमान में रूस, इंग्लैंड, ऑस्ट्रिया, ब्रिटिश, स्वीडन, हॉलैंड, कजाकिस्तान, इस्राइल, बुल्गारिया, स्पेन और फ्रांस आदि देशों के 150 से अधिक पायलट घाटी में फ्री फ्लायर के तौर पर उड़ान भर रहे हैं।
यह पायलट नवंबर के उत्तरार्द्ध तक अपने-अपने वतन वापस चले जाएंगे। पायलटों अरविंद पाल, ज्योति ठाकुर, हरदेव, मनजीत, मोहन सिंह, हैपी और शमशेर ठाकुर का कहना है कि प्रतियोगिता के न होने से पर्यटन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। पर्वतारोहण संस्थान मनाली के निदेशक नीरज राणा ने बताया कि अब तक सरकारी तौर पर किसी भी प्रतियोगिता के आयोजन की घोषणा नहीं हुई है।