बेटे की तरक्की हो तो मां-बाप का सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है। ऐसा दुखदायक एवं हृदय विदारक वक्त ईश्वर किसी को न दे कि बेटा कामयाब हो जाए और खुशियां बांटने के लिए वही दुनिया में न हो। संगड़ाह के कजवां गांव के परिजनों पर ऐसे ही दुखों का पहाड़ टूटा है। बेटे की कामयाबी की खबर तो मिली, लेकिन खुशियां बांटने के लिए वह दुनिया में नहीं रहा।
तीन दिन पहले जानवरों को भगाते वक्त गलती से चली बंदूक की गोली में जान गंवाने वाले पंकज की कामयाबी ने परिजनों के जख्म और गहरे कर दिए हैं। लोक सेवा आयोग की ओर से घोषित सहायक प्रोफेसर पद की भर्ती में दिवंगत पंकज का नाम भी उत्तीर्ण हुए उम्मीदवारों की सूची में है।
असिस्टेंट प्रोफेसर बनने के लिए 26 वर्षीय पंकज ने जीतोड़ मेहनत की थी। गौरतलब है कि संगड़ाह उपमंडल के कजवा गांव के पंकज की दो फरवरी को मौत हो गई थी। सुबह बंदरों को भगाने के लिए खेत की तरफ जा रहा था कि अचानक चाचा का पांव फिसल गया, जिससे चाचा की दोनाली बंदूक से गोली चल गई।