प्रदेश सरकार सूबे में आईपीएच विभाग की लंबित योजनाओं का काम शुरू करने के लिए केंद्र सरकार के माध्यम से एडीबी या ब्रिक्स से वित्तीय मदद लेने का प्रयास करेगी।
आईपीएच मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर ने कहा कि नाबार्ड की वित्तीय स्थिति ठीक ऐसी नहीं है कि वह हिमाचल की सभी लंबित 1887 योजनाओं के लिए पैसा दे सके। इन योजनाओं के लिए करीब आठ से नौ सौ करोड़ रुपये की जरूरत है।
ऐसे में नाबार्ड में लंबित परियोजनाओं के लिए बाहरी एजेंसियों से संपर्क किया जा रहा है। जिला चंबा के डलहौजी की विधायक आशा कुमारी के सलूणी, मंजीर, सुंडला और देवी (दियूर) पेयजल योजना के लंबित होने के सवाल के जबाव में आईपीएच
मंत्री ने कहा कि नाबार्ड के पास धनराशि की कमी के कारण यह परियोजना लंबित है। विधायक पेयजल योजना के लंबित होने से दो साल में इसके निर्माण के खर्च में 16 करोड़ रुपये की वृद्घि हुई है।
साल 2016 में बनाई गई डीपीआर में योजना के लिए करीब 34 लाख रुपये खर्च का एस्टीमेट था, जबकि 2018 में यह खर्च 50 करोड़ रुपये के करीब पहुंच गया है।