फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

दो साल से शिक्षक नहीं, बच्चों को पंचायत प्रधान खुद पढ़ा रहे अंग्रेजी-गणित का पाठ

Tue, 29 Jan 2019 10:36 AM IST
ashok chauhan दिनेश जस्पा, अमर उजाला, उदयपुर (लाहौल-स्पीति)
विज्ञापन
प्रतीकात्मक तस्वीर
विज्ञापन

बर्फ से लकदक रहने वाली लाहौल घाटी में शिक्षा राम भरोसे है। गोहरमा मिडिल स्कूल के हालात इसकी बानगी भर हैं। दो साल से स्कूल में गणित और अंग्रेजी पढ़ाने के लिए शिक्षक नहीं है। ऐसे में बच्चों को यह विषय पढ़ाने का जिम्मा पंचायत प्रधान ने खुद उठा रखा है।

विज्ञापन


गरमी के मौसम में अपने काम में व्यस्त रहने वाले प्रधान सर्दी होते ही स्कूल में शिक्षक की ड्यूटी निभाने लग जाते हैं। शिक्षकाें की तैनाती को लेकर विभाग और प्रशासन से गुहार लगाने के साथ वह खुद आकर बच्चों की कक्षाएं लेते हैं।

पंचायत प्रधान अरविंद कटोच बताते हैं कि गोहरमा मिडिल स्कूल में गणित और अंग्रेजी का टीचर नहीं होने पर वह खुद जाकर बच्चों को पढ़ा रहे हैं। शिक्षकों की तैनाती के लिए वह कई बार गुहार लगा चुके हैं लेकिन अभी तक सुनवाई नहीं हो पाई है।

विज्ञापन
Trending Videos
विज्ञापन

टीजीटी आर्ट्स और टीजीटी साइंस अध्यापक के पद खाली

तीन साल से गांव की इस पाठशाला में टीजीटी आर्ट्स और टीजीटी साइंस अध्यापक के पद खाली चल रहे हैं। लाहौल घाटी के कई स्कूलों में अध्यापकों की कमी के चलते शिक्षा की हालात बिगड़ गई है। यही वजह है कि 80 फीसदी बच्चे साइंस पढ़ने के लिए जिला से बाहर के स्कूलों में अध्ययनरत हैं।

समाज सेवक सुख राम और राम सिंह ने प्रधान अरविंद कटोच के इस नेक कार्यो को सराहा है। राम सिंह का कहना है सरकार गुणवत्तापरक शिक्षा के दावे तो करती है लेकिन धरातल पर हालात ठीक उलट हैं।

सरकार ने लाहौल घाटी के 11 स्कूलों में विज्ञान संकाय स्वीकृत कर रखे हैं। लेकिन रावमापा केलांग, उदयपुर और जाहलमां में ही साइंस की क्लासें चल रही हैं। उक्त पाठशाला में भी स्टाफ की कमी चल रही है।

शिक्षा उपनिदेशक लाहौल प्रेमनाथ परशीरा ने कहा कि हर माह अध्यापकों के रिक्त पदों का ब्यौरा सरकार को भेजा जाता है। उन्होंने कहा कि पंचायत प्रधान द्वारा बच्चों को स्वैच्छिक रूप से पढ़ाया जाना सराहनीय कार्य है। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें