पंचायत चुनाव का आरक्षण रोस्टर जारी होने में अभी वक्त लगेगा। रोस्टर सॉफ्टवेयर विवाद के बाद यह मामला और लंबा खिंचने लगा है। नया आरक्षण रोस्टर अब अक्तूबर तक ही जारी हो सकता है। लोगों की नजरें भी आरक्षण रोस्टर पर टिकी हैं। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने पिछले सप्ताह किसी भी तरह के आरक्षण रोस्टर सॉफ्टवेयर को उनके ध्यान में नहीं लाने की बात की थी, जबकि दूसरी ओर यह सॉफ्टवेयर जिलों को जारी कर दिया गया था।
इसी से गणना कर आरक्षण तय किया जाना था। मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया के बारे में जब पंचायतीराज मंत्री से पूछा गया था तो उन्होंने कहा था कि इसे अभी अंतिम रूप नहीं दिया गया है। अभी तो इसका ट्रायल चल रहा है। पिछले दिनों पंचायतीराज मंत्री अनिल शर्मा ने कहा था कि इस सॉफ्टवेयर की पहले व्यवहारिकता देखी जाएगी, उसके बाद आगे बढ़ा जाएगा। इसी कशमकश के बीच पंचायतों में आरक्षण तय करने की प्रक्रिया में देरी हो गई है।
अभी यही तय नहीं है कि रोस्टर सॉफ्टवेयर में डाले गए फार्मूले से ही आरक्षण तय होगा कि नहीं। सॉफ्टवेयर की जांच की जा रही है। अगर जांच में यह व्यवहारिक नहीं पाया गया तो इसे मैनुअली भी तय किया जा सकता है। यह मालूम रहे कि एक वरिष्ठ मंत्री ने भी सॉफ्टवेयर की मुख्यमंत्री कार्यालय में शिकायत की है कि अगर इसी के तहत आरक्षण तय किया गया तो इसका लाभ भाजपा को होगा। वहीं, पंचायतीराज विभाग के एक अधिकारी ने कहा कि अगर इस पर स्थिति जल्द स्पष्ट नहीं होती है तो चुनाव प्रक्रिया में देरी हो सकती है।