हिमाचल के जिला शिमला के रोहड़ू उपमंडल की एक पंचायत के सभी पद नामांकन से पहले ही देवता के नाम पर ‘नीलाम’ हो गए। नीलामी10 लाख रु. में लगी। ग्रामीणों ने निर्विरोध चुनाव को लेकर बैठक बुलाई थी। इसमें सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि पंचायत चुनाव का जो भी दावेदार मंदिर के निर्माण के लिए सबसे अधिक पैसा देगा, उसके नाम पर सहमति की मुहर लगाई जाएगी।
एक के बाद एक दावेदारों ने बोली लगाई और प्रधान पद की कुर्सी के लिए सबसे ज्यादा आठ लाख रुपये देने वाले पर रजामंदी बन गई। उपप्रधान पद 1.40 लाख और वार्ड सदस्य के पांच पद दस-दस हजार रुपये में नीलाम हुए। कुल दस लाख नीलामी राशि से गांव में मंदिर बनेगा। सूत्रों के अनुसार अब इनके अलावा गांव को कोई भी सदस्य पंचायत चुनाव में अपना नामांकन नहीं भरेगा।
सबसे ज्यादा आठ लाख रुपये देने वाले को मिलेगी प्रधान की कुर्सी
बताया जाता है कि प्रधान पद के दावेदारों ने पांच लाख से बोली शुरू की। चार उम्मीदवार बैठक में बोली लगाने के लिए मौजूद थे। प्रधान पद के लिए आखिरी बोली आठ लाख रुपये में लगी। प्रधान पद के चुने गए उम्मीदवार ने एक लाख रुपये की राशि अलग से गांव में धाम के लिए देने का एलान किया। उपप्रधान पद के लिए दो दावेदारों के बीच पांच हजार रुपये से बोली शुरू हुई। आखिरी बोली एक लाख चालीस हजार रुपये पर छूटी।
उसके बाद वार्ड सदस्यों के दावेदारों ने दस-दस हजार रुपये देकर पद लिए। बोली की राशि मौके पर ही लोगों के सामने जमा कर दी गई है। उम्मीदवारों से जुटाया पैसा गांव में देवता मंदिर निर्माण पर खर्च करने का फैसला लिया गया है। लोकतंत्र चुनने की इस अनूठी पहल की पूरी क्षेत्र में खूब चर्चा है।
पंचायत समिति और जिप के लिए भी ऑफर
गांव के लोग मान रहे हैं कि इस पहल से एक तो चुनाव में पैदा होने वाला विवाद खत्म हो गया, दूसरी ओर गांव के विकास को धन मिल गया। रुपये देकर बनी पंचायत में अब बड़ी दावत की तैयारी चल रही है। पता चला है कि तीन जनवरी को गांव में लोगों के लिए दावत हो रही है।
चुनावों में सहमति को लेकर हुई बैठक में पंचायत के लोगों ने यह भी तय किया कि पंचायत समिति और जिला परिषद सदस्य का जो दावेदार दो लाख रुपये की राशि देवता के नाम पर देगा, पूरी पंचायत के लोग उसे ही वोट देंगे।
अभी ये मामला हमारे संज्ञान में नहीं आया है। अगर कानून सम्मत सही होगा तो ठीक, वरना क्या कार्रवाई होगी इस पर विचार किया जाएगा। -टीजी नेगी, आयुक्त, राज्य चुनाव आयोग