हिमाचल में ग्राम पंचायतों में विकास कार्य फिलहाल पंचायत चुनाव की भेंट चढ़ जाएंगे। पंचायत चुनाव जनवरी के अंत तक पूरे होंगे। इसकी प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। आदर्श चुनाव आचार संहिता लगने के बाद नए कार्य शुरू नहीं किए जा सकेंगे। पहले ही कोरोना संक्रमण के बीच ग्राम पंचायतों में महीनों से कई विकास कार्य नहीं हुए हैं। अब करीब एक डेढ़ महीने तक यही स्थिति रहेगी।
राज्य की तमाम पंचायतें चुनाव संपन्न करवाने की प्रक्रिया में व्यस्त होंगी। ऐसे में विकास की कई गतिविधियां ठप हो जाएंगी। ऐसी स्थिति में इस साल की तीसरी तिमाही का बजट भी साल की चौथी तिमाही के अंत में खर्च हो पाएगा और इसे नई पंचायतों को आनन-फानन में खर्च करना होगा। इस स्थिति में प्रदेश के अधिकांश जिलाधीशों की ओर से पिछले एक महीने में पंचायतों को धड़ाधड़ बजट जारी किया जा रहा है।
इसमें सड़कों के निर्माण से लेकर अन्य तमाम तरह के कार्य शामिल हैं। 15वें वित्त आयोग का पैसा हो या आपदा राहत के तहत मिला बजट, तमाम तरह का पैसा या तो जिलाधीशों की ओर से पंचायतों में खंड विकास अधिकारियों को जारी किया गया है या पंचायतों को जारी किया गया है। इसे आने वाले दिनों में खर्च करने की स्थिति नहीं होगी।
लेटलतीफी पर मुख्यमंत्री कार्यालय खुद ले रहा संज्ञान
बजट खर्च में हो रही लेटलतीफी पर मुख्यमंत्री कार्यालय खुद संज्ञान ले रहा है। लोगों की ओर से मुख्यमंत्री कार्यालय में शिकायतें की जा रही हैं कि उन पंचायतों के लिए जारी किया गया बजट या तो जिलाधीश से खंड विकास अधिकारियों को नहीं आया है या खंड विकास अधिकारी इसे आगे पंचायतों को जारी नहीं कर रहे हैं या फिर पंचायतों में यह तकनीकी कारणों में फंसा है। सूत्रों के अनुसार बुधवार को भी ऐसे ही एक मामले में मुख्यमंत्री कार्यालय ने हस्तक्षेप कर किया और मामला कुछ आगे बढ़ा।