भले ही हिमाचल प्रदेश चुनाव आयोग लाहौल के केलांग और चंबा के पांगी में पंचायत चुनाव न करवा रहा हो। लेकिन, प्रदेश की 200 के करीब ऐसी पंचायतें हैं, जहां अमूमन जनवरी माह में भारी बर्फबारी होती है। मौसम ने साथ न दिया तो इन पंचायतों के मतदाताओं को बर्फ में चलकर मतदान केंद्रों पहुंचकर वोट डालना होगा। ऐसे में बीमार और बुजुर्ग मतदाताओं को चुनाव केंद्रों तक पहुंचाना भी चुनौती होगी। चुनाव ड्यूटी में लगे कर्मचारियों के लिए भी चुनाव सामग्री पहुंचाना आसान नहीं होगा।
मौजूदा समय में भी दर्जनों ऐसी पंचायतें हैं, जो अभी भी बर्फ से लकदक हैं। वैसे भी कोरोना के चलते हिमाचल प्रदेश में इस बार मतदान प्रतिशत पर असर पड़ने के आसार हैं। मंडी की करीब 97, किन्नौर के कल्पा, निचार और पूह के ऊपरी इलाकों की 30 पंचायतें, स्पीति की दस, सिरमौर के हरिपुरधार और नौहराधार की 16, चंबा की 23, कुल्लू की करीब 18, बैजनाथ उपमंडल की सात, शिमला के डोडराक्वार उपमंडल की पांच पंचायतों डोडरा, क्वार, धंडरवाड़ी, जिस्कून, जाखा आम तौर पर जनवरी में बर्फ से लकदक रहती हैं।
वहीं, मंडी के चौहारघाटी की 14 स्नो बाउंड पंचायतों में कूटगढ़, बरोट, लपास, बरधाण,धमच्याण, लटराण, तरस्वाण, सुधार, शिल्बुधाणी, कथोग, रोपा, बल्ह, बथेरी और सनवाड़ शामिल हैं। जबकि जंजैैहली ब्लॉक की 33 और गोहर बालीचौकी की 50 पंचायतें स्नो बाउंड एरिया में शामिल हैं। इनमें छतरी, जंजैहली, थुनाग, तुंगाधार, ढीमकटारू, रोड, बगस्याड़, कांढा बगस्याड़, मुरहाग, बागाचणोगी, लंबाथाच, चियूणी, थाची, थाची डीडर, पंजाई, शैटाधार, मगरू, देवी दहड़, कुल्थनी, सोमनाचनी, चेत, सरयाच आदि शामिल हैं।
दिसंबर और जनवरी माह में यहां कड़ाके की ठंड से जनजीवन जाम रहता है। दोनों माह में भारी बर्फबारी दर्ज की जाती है। ऐसे में इन क्षेत्रों में चुनाव संपन्न करवाना चुनौतियों से भरा हो सकता है। वहीं, चंबा के सलूणी उपमंडल के भांदल, सनूंह, किलोड़, सूरी, डांड, पिछला डियूर, कंधवारा, भडेला, भरमौर की बडग्रां, कुगति, हडसर, होली के क्वारसी, गरोला, बजोल, न्याग्रां सहित तीसा के टेपा सहित अन्य ऊपरी गांवों में एक से दो फीट तक बर्फबारी हो जाती है।