जब्त दवाएं नकली हैं या असली, इसका पता लगाने के लिए विभागीय टीम ने दवाइयां लैबोरेटरी में जाच के लिए भेज दी हैं। नूरपुर स्थित अस्पताल में तैनात ड्रग इंस्पेक्टर प्यार ठाकुर ने बताया कि विभाग ने दवाइयां अपने कब्जे में ले ली हैं।
हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के इंदौरा के सूरजपुर इलाके में स्वास्थ्य विभाग की मंजूरी लिए बिना दर्द निवारक दवा बनाने वाली एक कंपनी से पौने दो लाख टैबलेट बरामद की गईं। गुरुवार को ड्रग लाइसेंस अथॉरिटी नूरपुर की टीम ने कंपनी परिसर में छापा मारकर दवाएं बरामद कीं। दर्द की यह दवा आइबूप्रोफेन और पैरासिटामोल दो साल्ट मिलाकर बनाई गई हैं।
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दवा प्लास्टिक के पाउच में थी। हैरत इस बात की है कि कुछ अरसा पहले स्वास्थ्य विभाग की टीम ने इसी कंपनी के बनाए रेमडेसीविर के 16 बॉक्स में 400 नकली वायल मध्य प्रदेश के भोपाल में पकड़े थे। गुरुवार को जब्त दवाएं नकली हैं या असली, इसका पता लगाने के लिए विभागीय टीम ने दवाइयां लैबोरेटरी में जाच के लिए भेज दी हैं।
नूरपुर स्थित अस्पताल में तैनात ड्रग इंस्पेक्टर प्यार ठाकुर ने बताया कि विभाग ने दवाइयां अपने कब्जे में ले ली हैं। किसी भी दवा को बनाने से पहले ड्रग लाइसेंस अथॉरिटी से मंजूरी लेनी पड़ती है। लेकिन, एक दवा कंपनी द्वारा विभाग से बिना अप्रूवल लिए दवाइयां बनाई जा रही थीं।
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अगर दवाइयों में खराबी पाई जाती है तो कंपनी मालिक पर मामला दर्ज किया जाएगा। दवा निरीक्षक ने बताया कि कंपनी ने रेमडेसिविर इंजेक्शन बनाने के लिए धर्मशाला स्थित हाई अथॉरिटी को पत्र लिखा था, लेकिन अप्रूवल न मिलने के बावजूद नकली इंजेक्शन बनाए थे।