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विशेष बातचीत: प्रसिद्ध हास्य कवि पदमश्री अशोक चक्रधर बोले- परिवार छुट्टी मनाता था, मैं किताबें लिखता था

Sat, 17 Dec 2022 11:13 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला

सार

शिमला के ऐतिहासिक गेयटी थिएटर में आयोजित जश्न ए अदब कल्चरल कारवां में हिस्सा लेने शिमला पहुंचे प्रो. चक्रधर ने अमर उजाला से विशेष बातचीत में बताया कि वह छुट्टियां मनाने अक्सर शिमला आते थे। एक बार दो महीने वह फागू में रहे।
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प्रसिद्ध लेखक एवं हास्य कवि पद्मश्री प्रो. अशोक चक्रधर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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आजादी के अमृत महोत्सव के तहत राजधानी शिमला के गेयटी थियेटर में दो दिवसीय जश्न ए अदब कल्चरल कारवां शुक्रवार से शुरू हो गया। प्रसिद्ध कवि एवं लेखक पद्मश्री प्रो. अशोक चक्रधर ने दीप जलाकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। पहले दिन कवि सम्मेलन और नाटक ए मैरिज प्रपोजल आकर्षण का केंद्र रहे। कार्यक्रम की शुरुआत में लेखक फरहत एहसास और मदन मोहन दानिश ने जीवन और साहित्य में अदब न हो तो विषय पर विचार रखे। इसके बाद लेखक संजीव जौहरी के नाटक ए मैरिज प्रपोजल का मंचन किया।  नाटक में शादी का प्रस्ताव लेकर गए युवक ईवान और युवती पक्ष के बीच हास्य तथा विवाद को दर्शाया गया। युवक के शादी के प्रस्ताव को दो बार लड़ाई के चलते रिजेक्ट कर दिया जाता है लेकिन आखिर में युवती के साथ इसकी शादी हो जाती है। शाम को करवाया कवि सम्मेलन भी आकर्षण का केंद्र रहा। कल्चरल कारवां के दौरान बॉलीवुड अभिनेत्री एवं लेखक दिव्या दत्ता ने अपनी किताब द स्टार्स इन माय स्काई को लेकर जानकारी दी।

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 दुनिया भर में अपनी हास्य कविताओं से सुर्खियां बटोरने वाले प्रसिद्ध लेखक एवं हास्य कवि पद्मश्री प्रो. अशोक चक्रधर ने आठ किताबें शिमला के पर्यटक स्थल फागू में लिखी थीं। शिमला में लिखी इन किताबों की कई किताबें भी खासी चर्चा में रहीं।  शिमला के ऐतिहासिक गेयटी थिएटर में आयोजित जश्न ए अदब कल्चरल कारवां में हिस्सा लेने शिमला पहुंचे प्रो. चक्रधर ने अमर उजाला से खास बातचीत में बताया कि वह छुट्टियां मनाने अक्सर शिमला आते थे। एक बार दो महीने वह फागू में रहे। यहां पत्नी और उनके दो बच्चे छुट्टी मनाते रहे तो वह यहां की वादियों में बैठकर किताबें लिखते थे। हंसो और मर जाओ, चुटपुट कुले, ऐ जी सुनिए, इसलिए बोड़मजी इसलिए जैसी हास्य किताबें शिमला के फागू में लिखी गईं। प्रो. चक्रधर ने बताया कि साल 1988 में शिमला समर फेस्टिवल में उन्होंने कवि सम्मेलन करवाया था। यह पहला मौका था जब समर फेस्टिवल में कवियों ने ठहाके लगाए थे। इसके बाद कई बार शिमला आने का मौका मिला है। कहा कि 90 के दशक में हिमाचल विधानसभा के अध्यक्ष रहे राधा रमन शास्त्री के साथ उनकी अच्छी जान पहचान थी। 
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