फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

महिला कैदियों के लिए सैनिटरी नैपकिन बना रहे जेल के 'पैडमैन'

Fri, 09 Feb 2018 06:41 PM IST
प्रखर दीक्षित, अमर उजाला, शिमला
विज्ञापन
Sanitary Pads - फोटो : Facebook
विज्ञापन
सूबे की एक जेल के अधिकारी को महिलाओं को पीरियड के दौरान होने वाली परेशानियों से इतनी कोफ्त हुई कि उसने जेल में ही सेनेटरी नैपकिन तैयार करने की ठान ली। स्थानीय लोगों की मदद से पैड बनाने की एक मशीन खरीदी। इसकी मदद से महिला बंदियों की परेशानियां काफी हद तक कम कर दीं। जेल की बंदियों की परेशानी खत्म करने के बाद अब पैड मैन अन्य जेल और आम महिलाओं को भी सेनेटरी नैपकिन मुहैया कराने की तैयारी में है। 
विज्ञापन


नाहन की मॉडर्न सेंट्रल जेल में तैनात जेल सुपरिंटेंडेंट जय गोपाल लोदटा लंबे समय से पीरियड के दौरान महिला बंदियों को होने वाली संक्रमण और अन्य तरह की बीमारियों से जूझ रहे थे। ज्यादातर महिला बंदी पैड की बजाय सूती कपड़े का इस्तेमाल करती थीं।

इस वजह से अकसर कोई न कोई महिला बीमार रहती थी। इस पर लोदटा ने पहले जेल में सेनेटरी नैपकिन लाने की छूट दी, लेकिन आर्थिक रूप से अक्षम होने के चलते जब महिलाएं परेशानी से जूझती रहीं तो लोदटा ने अपने स्तर से इस समस्या को खत्म करने का बीड़ा उठाया। नाहन के कुछ समाजसेवियों से संपर्क किया और उनसे मिले चंदे से पैड बनाने वाली मशीन खरीदकर जेल में ही पैड बनाना शुरू किया। लोदटा के मुताबिक फिलहाल इस मशीन से तैयार हो रहे पैड नाहन सेंट्रल जेल में महिला बंदियों को मुफ्त उपलब्ध कराए जा रहे हैं। आने वाले समय में इन्हें अन्य जेलों में महिला बंदियों को भी उपलब्ध कराया जाएगा।
विज्ञापन

 
विज्ञापन

पैकिंग कर बाहर भी करेंगे सप्लाई

महिला कैदियों को निशुल्क नैपकिन मुहैया कराने के बाद अब जेल प्रशासन इसे व्यवसायिक रूप से भी मार्केट में उपलब्ध कराने पर विचार कर रहा है। डीजी जेल सोमेश गोयल ने बताया कि पैकिंग मशीन खरीदने का प्रयास किया जा रहा है। अगर मशीन मिल जाती है तो उसके बाद अन्य किसी भी कंपनी से कम दाम पर अच्छी गुणवत्ता वाले नैपकिन महिलाओं को बाजार में भी मुहैया होंगे।

स्कूलों में पैड वितरण पर हो रहा पत्राचार
डीजी गोयल ने बताया कि नाहन सेंट्रल जेल में लगी मशीन से शुरू में ट्रायल के तौर पर उत्पादन किया गया। अब इसे अन्य जेलों की महिला कैदियों को भी वितरित किया जाना है। सरकार से पत्राचार किया जा रहा है कि अगर वह मंजूरी दे तो सरकारी स्कूलों में बच्चियों को भी न्यूनतम दरों पर नैपकिन मुहैया कराए जा सकें। 
 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें