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पद्मश्री मिलना संस्कृत भाषा और इससे जुड़े लोगों का सम्मान: प्रो. अभिराज

Tue, 28 Jan 2020 05:00 AM IST
Krishan Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
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प्रो. अभिराज राजेंद्र मिश्र - फोटो : अमर उजाला
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गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर पद्मश्री सम्मान के लिए 118 लोगों की सूची में शुमार होने वाले प्रो. अभिराज राजेंद्र मिश्र ने कहा कि यह उनका नहीं, बल्कि संस्कृत भाषा और इससे जुड़े लोगों का सम्मान है। हिमाचल मेरी कर्मभूमि है। यहां से पारिवारिक भी रिश्ता है, क्योंकि इनकी पत्नी डॉ. राजेश कुमारी हमीरपुर जिले से हैं। वे समरहिल में रहते हैं।

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वर्ष 1988 में उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला था। अमर उजाला से बातचीत में प्रो. मिश्र ने कहा कि पद्मश्री की घोषणा होने के बाद उन्हें बधाइयां आ रही हैं। यह सम्मान मिलने से अहसास हुआ कि उनका जो लक्ष्य था कि संस्कृत भाषा के ज्ञाता को सिर्फ पुराने, वैदिक काल का न समझा जाए, वह पूरा हुआ है। इससे सभी भाषाओं की जननी संस्कृत को सम्मान मिलेगा और इसका प्रचार-प्रसार होगा।

वे संस्कृत को सर्वोच्च स्थान दिलवाने के लिए प्रयासरत रहेंगे। उन्होंने अपने कार्यों और साहित्य से साबित करने का प्रयास किया कि संस्कृत पंडितों, ज्योतिषियों और वेदों की भाषा नहीं है, इसे पढ़ने वाला भी उतने ही नए विचारों का हो सकता है। अपनी रचनाओं, साहित्य कहानियों, काव्य संग्रह, एकांकियों में हर समसामयिक समाज से सीधे जुड़े विषयों को शामिल किया है। 

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प्रो. अधिराज राजेंद्र मिश्र का आज तक का सफर 

- फोटो : अमर उजाला
प्रो. अभिराज राजेंद्र मिश्र संस्कृत भाषा के प्रकांड पंडित, मूर्धन्य कवि, नाट्यकार, कथाकार एवं ओजस्वी वक्ता हैं। इलाहाबाद के बाद 1991 से एचपीयू में 2003 तक संस्कृत के प्रोफेसर के रूप में सेवाएं दीं।  अध्यक्ष व भाषा संकाय के अधिष्ठाता रहे। 2002 से 2005 तक में संपूर्णानंद संस्कृत विवि काशी के कुलपति रहे। वर्तमान में संप्रति व साहित्य अकादमी की संस्कृत परामर्र्शदात्री समिति (2018-2023) के संयोजक हैं। संस्कृत, हिंदी, भोजपुरी तथा प्राचीन जावी भाषाओं में पारंगत हैं।

उनके दो सौ से अधिक ग्रंथ प्रकाशित हुए हैं। इनमें 150 संस्कृत के हैं। इन्होंने दो विशाल महाकाव्य, 27 खंड काव्य, सात गीत संग्रह, आठ गजल संग्रह, (प्राय: 700 गजलें) चार नाटक-नाटिका, नौ एकांकी-संग्रह, सात कथा संग्रह तथा दर्जनों समीक्षा ग्रंथ प्रणीत कर अर्वाचीन-संस्कृत को नई पहचान दी है। प्रो. मिश्र हिमाचल विवि के पहले विद्वान हैं, जिन्हें पद्मश्री से नवाजा जाएगा। उन्होंने हिमाचल विवि सहित इलाहाबाद, राजस्थान, संस्कृत विवि के कुलगीत लिखे हैं। एचपीयू के कुलपति प्रो. सिकंदर कुमार ने प्रो. मिश्र को पद्मश्री मिलने पर बधाई दी है। 
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