प्रो. अभिराज राजेंद्र मिश्र संस्कृत भाषा के प्रकांड पंडित, मूर्धन्य कवि, नाट्यकार, कथाकार एवं ओजस्वी वक्ता हैं। इलाहाबाद के बाद 1991 से एचपीयू में 2003 तक संस्कृत के प्रोफेसर के रूप में सेवाएं दीं। अध्यक्ष व भाषा संकाय के अधिष्ठाता रहे। 2002 से 2005 तक में संपूर्णानंद संस्कृत विवि काशी के कुलपति रहे। वर्तमान में संप्रति व साहित्य अकादमी की संस्कृत परामर्र्शदात्री समिति (2018-2023) के संयोजक हैं। संस्कृत, हिंदी, भोजपुरी तथा प्राचीन जावी भाषाओं में पारंगत हैं।
उनके दो सौ से अधिक ग्रंथ प्रकाशित हुए हैं। इनमें 150 संस्कृत के हैं। इन्होंने दो विशाल महाकाव्य, 27 खंड काव्य, सात गीत संग्रह, आठ गजल संग्रह, (प्राय: 700 गजलें) चार नाटक-नाटिका, नौ एकांकी-संग्रह, सात कथा संग्रह तथा दर्जनों समीक्षा ग्रंथ प्रणीत कर अर्वाचीन-संस्कृत को नई पहचान दी है। प्रो. मिश्र हिमाचल विवि के पहले विद्वान हैं, जिन्हें पद्मश्री से नवाजा जाएगा। उन्होंने हिमाचल विवि सहित इलाहाबाद, राजस्थान, संस्कृत विवि के कुलगीत लिखे हैं। एचपीयू के कुलपति प्रो. सिकंदर कुमार ने प्रो. मिश्र को पद्मश्री मिलने पर बधाई दी है।