विवि के नए फैसले से छात्र संघ चुनाव की लोकतांत्रिक व्यवस्था खत्म हो गई है। अब विवि में प्रत्यक्ष रूप से नहीं बल्कि क्लास मॉनीटर की तरह छात्र संघ के नेताओं का चुनाव होगा।
एससीए के गठन की प्रक्रिया में शिक्षक ही क्लास टॉपर, खेल, एनसीसी, एनएसएस, सांस्कृतिक गतिविधियों में अव्वल रहने वाले छात्र को कक्षा और विभाग प्रतिनिधि के रूप में चुनेंगे। इसमें कॉलेज का आम छात्र सीधे तौर पर अपने प्रतिनिधियों को नहीं चुनता, बल्कि स्कूलों में क्लास माॅनीटर की तरह से छात्र प्रतिनिधि चुने जाते हैं।
हालांकि अप्रत्यक्ष चुनाव की प्रक्रिया तय करने के लिए अलग कमेटी बना दी गई है, लेकिन चलन में अप्रत्यक्ष चुनाव का यही फार्मूला कई विश्वविद्यालयों में लागू है। विश्वविद्यालय और प्रदेश भर के कॉलेजों में 1986 से 88 तक और 1994 से 1999 तक हिंसा को ही आधार मान कर प्रत्यक्ष छात्र संघ चुनाव पर प्रतिबंध लगाया गया था।