पौधों के लिए सहारा देने के लिए लकड़ी के खंभों और तारों का उपयोग किया गया है। पौधों की देखभाल के लिए सिंचाई की व्यवस्था भी की गई है। एक बार लगने के बाद ड्रैगन फ्रूट करीब 25 साल तक फल देता है। सुनील ने बताया कि अगले साल आस्ट्रेलिया से पौधे मंगवाएंगे। ड्रैगन फ्रूट की खेती के लिए ऊना, सोलन, बिलासपुर और हमीरपुर जिलों को आदर्श माना जाता है। इन क्षेत्रों की जलवायु और मिट्टी की संरचना इस फल के लिए बेहद अनुकूल है। यहां की गर्म और शुष्क जलवायु ड्रैगन फ्रूट की वृद्धि के लिए उपयुक्त है। सुनील चंदेल ने कहा कि ड्रैगन फ्रूट की खेती आर्थिक रूप से बहुत फायदेमंद है।
बाजार में है फल की बहुत मांग
ड्रैगन फ्रूट की बाजार में खूब मांग है। यह फल मंडी में 150 रुपये में बिक रहा है। भारत में आने वाला 70 प्रतिशत ड्रैगन फ्रूट ऑस्ट्रेलिया, वियतनाम और इंडोनेशिया से निर्यात किया जाता है। ऐसे में यह फल प्रदेश में किसानों की आए बढ़ाने के लिए रामबाण साबित हो सकता है।
ड्रैगन फ्रूट में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट तत्व कैंसर से लड़ने में मदद करते हैं। यह फल विटामिन सी से भरपूर होता है, जो प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करता है और सर्दी-जुकाम जैसी बीमारियों से बचाव करता है। ड्रैगन फ्रूट में फाइबर की मात्रा अधिक होती है जो पाचन को सुधारने और कब्ज से राहत दिलाने में सहायक है। यह फल फ्री रेडिकल्स से लड़ने में मदद करता है। इससे त्वचा की उम्र बढ़ने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है।