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विधानसभा में पेश हुआ मुख्यमंत्री, मंत्रियों और विधायकों के वेतन कटौती का अध्यादेश

Thu, 10 Sep 2020 10:23 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
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- फोटो : अमर उजाला
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जयराम सरकार ने विधानसभा के मानसून सत्र में  मुख्यमंत्री, विधानसभा अध्यक्ष, मंत्रियों, उपाध्यक्ष, विधायकों समेत संवैधानिक पदों पर बैठे नेताओं के वेतन में अगले एक साल तक तीस फीसदी की कटौती संबंधी अध्यादेश सदन में पेश कर दिया। अध्यादेश के साथ मुख्यमंत्री की ओर से इस बात की भी जानकारी दी गई कि क्यों वेतन कटौती संबंधी अध्यादेश लाने की जरूरत पड़ी। बताया कि कोविड के दौरान लड़ाई लड़ने के लिए फंड जुटाने के उद्देश्य से मंत्रियों, विधानसभा अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, मुख्य सचेतक, विधानसभा सदस्यों और अन्य गणमान्य लोगों के वेतन में कटौती की गई। चूंकि, प्रदेश विधानसभा का सत्र नहीं चल रहा था और वेतन कटौती के लिए वेतन व भत्तों से संबंधित कानून में संशोधन आवश्यक था। इसलिए राज्यपाल ने 11 अप्रैल को आर्डिनेंस को मंजूरी दे दी। बता दें, कोरोना के दौरान केंद्र सरकार के वेतन कटौती के फैसले के बाद प्रदेश सरकार से कटौती का निर्णय लिया था। तय हुआ कि इस कटौती से जुटाई गई राशि को मुख्यमंत्री कोविड फंड में जमा कराया जाएगा और जरूरत के अनुसार उसे खर्च किया जाएगा। 

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वेतन कटने से विपक्ष नाखुश है तो लिखकर दें, सबका पैसा होगा वापस
कोरोना संकट के बीच काटे जा रहे विधायकों के वेतन को लेकर भी मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने विपक्षी विधायकों पर जोरदार हमला बोला। कहा कि वेतन कटने से विपक्ष नाखुश है तो लिख करे दे। सबका पैसा वापस करवा दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि दान की गई राशि का शोर नहीं मचाया जाता है। यह पैसा इस संकट की घड़ी में लोगों की मदद के लिए खर्च किया जा रहा है। कहा कि माकपा विधायक राकेश सिंघा ने वेतन नहीं लेने को लेकर एक साल के चेक एडवांस में दे दिए हैं। असल भाव इसे कहा जाता है। सिंघा ने इस बारे कहीं भी ढिंढोरा नहीं पीटा। कहा कि कांग्रेस न जाने और किस हद तक गिरेगी। शर्म की भी एक सीमा होती है। कांग्रेस विधायकों ने तो हर हद को लांघ दिया है। सरकार को कांग्रेस विधायकों का इस तरह का कोई एहसान नहीं चाहिए। सदन में कांग्रेस का व्यवहार बर्दाश्त करने योग्य नहीं है। कांग्रेस का ये सोचना कि जिसे सहन करना आता है, उसे कहना नहीं आता गलत है।

कांग्रेस और कोरोना की राशि एक
मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस और कोरोना की राशि एक है। बीमारी तो लाइलाज है, लेकिन कांग्रेस का इलाज तो कई राज्यों में हो चुका है। लगता है कि कोरोना वायरस इनके दिमाग में घुस गया है। जिन राज्यों में कांग्रेस की सरकारें हैं, वहां हालात बहुत खराब हैं। कांग्रेस को असल दुख तो इस बात का है कि आज के समय में उनकी केंद्र और प्रदेश में सरकार नहीं है। अगर उनकी सरकारें होती तो इन्हें लूट का अवसर मिल जाना था। 

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सहकारी सोसायटी के स्वैच्छिक गठन को प्रोत्साहित करेगी सरकार

सहकारिता मंत्री सुरेश भारद्वाज ने सदन में हिमाचल प्रदेश सहकारी सोसायटी अधिनियम-1968 (1969 का अधिनियम संख्यांक 3) के और संशोधन करने के लिए विधेयक को पुनर्स्थापित करने की अनुमति देने के लिए विधेयक रखा। इसके तहत किए गए संशोधन में राज्य नीति के मार्गदर्शक सिद्धांतों से संबंधित अध्याय में नया अनुच्छेद 43 भी स्थापित किया है। इसमें यह उपबंध किया है कि राज्य को सहकारी सोसायटी के स्वैच्छिक गठन, स्वायत्त कार्यशैली, लोकतांत्रिक नियंत्रण और व्यावसायिक प्रबंधन को प्रोत्साहित करने के लिए प्रयत्न करना होगा।

मंत्री ने बताया कि सहकारी सोसायटी के रजिस्ट्रीकरण और उसकी संपरीक्षा से संबंधित उपबंधों को भारत के संविधान के 97 संशोधन के अनुरूप लाने की आशा से यह संशोधन करना आवश्यक था। इसके अलावा केंद्र सरकार ने अनियमित जमा योजना प्रतिबंध अधिनियम 2019 अधिनियमित किया है। इसमें सहकारी सोसायटी में गैर सदस्यों से निक्षेप प्राप्त करना प्रतिबंधित किया गया है। भारतीय रिजर्व बैंक ने भी सहकारी सेक्टर में सुधार करने के लिए कुछ सिफारिशें की हैं।
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